अगस्त क्रांति दिवस के मौके पर हिलसा में 11 वीर सपूत शहीद हुए थे ..!!
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ "भारत छोडो आंदोलन" की याद में आज ही के दिन 1942 में महात्मा गांधी के आह्वान पर लाखों भारत माता के गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए संग्राम में कूद पड़े थे। इस दौरान हजारों क्रांतिकारी बंदी बना लिए गए। ब्रिटिश शासन की गोलियों के सैकड़ों शिकार हुए। लेकिन शासकीय दमन के बावजूद क्रांति की ज्वाला भड़कती गयी और विद्रोह भी बढ़ता गया। गांधी जी ने नारा दिया - "करो या मरो"। इस आह्वान के बाद ब्रिटिश सरकार ने भी दमनात्मक कदम उठाए और महात्मा गांधी समेत सभी बड़े क्रांतिकारियों को जेल में डाल दिया गया । राष्ट्रपिता महात्मा गाधी के आवाह्न पर जब देश से अंग्रेजों को भगाने के लिए भारत के नौजवान कूद पड़े थे। ऐसे में नालंदा जिले के हिलसा के नौजवान कहा पीछे रहने वाले थे। राम बाबू हाई स्कूल के मैदान में सैकड़ों की संख्या में जुटे हिलसा के युवाओं ने बैठक करने के बाद हिलसा थाना पर तिरंगा फहराने का निर्णय लिया था। उत्साही युवाओं ने बैठक के तुरंत बाद ही हिलसा थाना पर तिरंगा फहराने के लिए पहुंच गए थे। उन युवाओं पर अंग्रेजी हुकूमत के सिपाहियों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दी थी। जिसमें दर्जन भर से ज्यादा युवा अंग्रेजों के द्वारा चलाई गई गोलियों के शिकार हुए थे। हिलसा थाना के सामने जिस स्थल पर युवाओं की लाशें पड़ी थी, वहीं पर शहीद एवं गोलियों से घायल युवाओं पर अंग्रेजी सिपाहियों ने पेट्रोल छिड़क कर जला देने का क्रूरतापूर्ण कार्य किया था। 11 शहीद युवाओं की याद में हिलसा थाना के ठीक सामने अवस्थित शहादत स्थल के एक छोटे से भाग के एक कोने में शहीद स्मारक बना हुआ है। जिस पर अगस्त क्राति में शहीद हुए 11 युवाओं का नाम अंकित है। जिसमें अगस्त क्राति में शहीद होने वाले हिलसा के वीर सपूत बालगोबिंद ठाकुर, ग्राम - कछियावां - 25 वर्ष , नारायण पांडेय, ग्राम -कछियावां- 18 वर्ष, भीमसेन महतो,ग्राम - इंदौत- 20 वर्ष , सदाशिव महतो, ग्राम -बढ़नपुरा-20 वर्ष, केवल महतो, ग्राम - बनवारा-32 वर्ष, सुखाड़ी चौधरी,ग्राम -हिलसा-18 वर्ष, दुखन राम, ग्राम -गन्नीपुर- 21 वर्ष, रामचरित्र दुसाध, ग्राम -बनवारीपुर-18 वर्ष, शिवजी राम, ग्राम -हिलसा-25 वर्ष, हरिनंदन सिंह, ग्राम - मलावा-19 वर्ष, भोला सिंह, ग्राम -बनवारा- 21 वर्ष, भीमसेन महतो, ग्राम - इंदौत- 20 वर्ष थे।
अगस्त क्रांति से प्रेरित होकर पटना में भी छात्रों ने सरकार विरोधी प्रदर्शन किए और सचिवालय पर झंडा फहराने का संकल्प लिया। इस दौरान 11 अगस्त को झंडा फहराने के क्रम में सात युवा शहीद हो गए। इनके अलावा भी देश के विभिन्न हिस्सों में सैकड़ों लोग शहीद हुए। आज हम उन सभी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने जीवन की आहूति दे दी। उनके बलिदान का ही परिणाम है कि आज हम आजाद भारत की खुली हवा में सांस ले रहे हैं। ऐसे सपूतों को एक बार हम फिर नमन करते हैं और उनके प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।
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