ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक संपन्न, 16 फरवरी के देशव्यापी संयुक्त कार्रवाई को जिले में सफल बनाए जाने की बनी रणनीति
बिहारशरीफ,11 फरवरी 2024 : केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच और संयुक्त किसान मोर्चा की एक बैठक नालन्दा जिले के एटक कार्यालय में की गई।
मौके पर सेमिनार में ऐक्टू के राज्य उपाध्यक्ष कॉमरेड मकसूदन शर्मा ने कहा कि पिछली सरकारों की राह पर चलते हुए वर्तमान केंद्र की फासीवादी चरित्र वाली मोदी सरकार द्रुत गति से आगे बढ़ रही है एवं मात्र 10 वर्षों में इसने लोगों की जीवन और जीविका दोनों पर जबरदस्त कुठाराघात किया है। बेराजगारी, नौकरी खत्म होना चरम पर है, जिसके कारण समाज में अपार दुख, कष्ट और संकट आ खड़ी हुई है। लगातार मूल्यवृद्धि व वास्तविक मजदूरी घट रही है। सार्वजनिक उपक्रमों को या बंद किया जा रहा है या तो निजी हाथों में बेचा जा रहा है। नौजवानों को नौकरी नहीं मिल रही है, जबकि सरकारी विभागों में लाखों रिक्तियाँ पड़ी हुई है। उन्होंने कहा- केंद्र सरकार की मजदूर, किसान विरोधी, जन विरोधी और राष्ट्र विरोधी नीतियों के खिलाफ महाव्यापी अभियान चलाकर 16 फरवरी 2024 को देशव्यापी ग्रामीण बंद और औद्योगिक हड़ताल के आह्वान को बिहार में सफल बनाए जाने का निर्णय लिया गया। संयुक्त बैठक में यह बात भी सामने आयी कि मजदूर वर्ग के तीखे तेवर के कारण अभी देश में मजदूरों को गुलाम बनाने वाला चार लेबर कोड लागू नहीं हुआ है, लेकिन बिहार सहित देश के औधोगिक क्षेत्रों में अवस्थित निजी कल-कारखानों में नियोजकों द्वारा 8 घंटे के बजाए 12 घंटे काम लिया जा रहा है। इसके चलते तीन शिफ्ट के बजाए दो शिफ्टों में ही काम निपटाने की प्रणाली शुरू कर दी गई है लेकिन राज्य का श्रम विभाग कानों में तेल डालकर बैठा हुआ है। ट्रेड यूनियनो ने मजदूरों के इस निर्मम शोषण के खिलाफ आंदोलन किए जाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा- पिछले दिनों मजदूरों- किसानों के 21 सूत्री मांग-पत्र पर आयोजित सफल देशव्यापी महापड़ाव के बाद 16 फरवरी 2024 को अखिल भारतीय स्तर पर होने वाले संयुक्त जुझारू जन कार्रवाई के कार्यक्रम को बिहार में लागू किए जाने की एक कार्ययोजना तय की गई है। इस लिए इस आंदोलन को जनमत के सहयोग से आंदोलन को सफल बनायें।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव राजकिशोर प्रसाद यादव ने बताया कि 11 फरवरी 2024 से 15 फरवरी 2024 तक मजदूरों-किसानों के ज्वलंत व वर्गीय मुद्दों और विभिन्न गांव के कामगारों के विशेष मांगों पर सघन अभियान चलाया जाय, जिसके अंतर्गत कल कारखानों, किसानों, मजदूर बस्तियों, रिहायशी इलाकों और गांवों में पद यात्रा किया जाय, मोटर साइकिल जुलूस और नुक्कड़ सभा आयोजित कर लोगों के बीच पर्चे बांटें जायेंगे। इस व्यापक जन संपर्क अभियान का समापन 16 फरवरी 2024 को लाखों मजदूरों-किसानों की गोलबंदी से होगा जिसमें रास्ता रोको-रेल रोको, हड़ताल, जूलूस- प्रदर्शन का आह्वान किया जाएगा।
मौके पर नेता मो.जाहिद अंसारी ने कहा कि भारत की पूरी अर्थव्यवस्था कुछ मुट्ठी भर कॉर्पोरट एवं पूंजीपतियों के हाथों में चली गई है। ऐसी ही नीति केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी लेकर चल रही है। उन्होंने कहा- सुरसा की तरह बढ़ती मंहगाई को रोकने के लिए "दाम बांधो आन्दोलन" चलाया जाए। नरेन्द्र मोदी सांप्रदायिकता के रथ पर चढ़ कर आए हैं।सांप्रदायिकता के खिलाफ़ की लड़ाई को मुख्य मुद्दा बना दिया जाए तो मोदी की विदाई निश्चित हो जाएगी।
सेमिनार में भाकपा माले के जिला सचिव कॉमरेड सुरेन्द्र राम ने कहा कि वर्तमान में आंकड़े से यह सिद्ध हो जाता है कि भारत में शीर्ष 10% के हाथों राष्ट्रीय आय का 72% सिर्फ, 1% के हाथों 40.5%, जबकि 50% का हिस्सा घटकर मात्र 3% रह गया है। 21 भारतीय अरब पतियों के पास इतनी बडी संपत्ति है जो 70% आबादी के पास है। उन्होंने कहा- मजदूरों की एकता को तोड़ने के लिए जातीयता, धार्मिक भावनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीएए, एनआरसी और लव जिहाद जैसे मुद्दे से सांप्रदायिक/धुर्वीकरण किया जा रहा है। जो देश हित के लिए बहुत ही घातक सिद्ध हो रहा है।
माले नेता कॉमरेड बिनोद कुमार रजक ने कहा कि जन विरोधी, देश विरोध, मजदूर विरोध नीतियों का वर्तमान में मुकाबला करने के लिए एकजुट जुझारू श्रमिक आंदोलन की जरूरत।
अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला सचिव पाल बिहारी लाल ने कहा कि पिछले आंदोलन में जैसे बीपीसीएल, सीईएल, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, यूपी, हरियाणा और पुडुचेरी के बिजली कर्मचारियों का एकजुट आंदोलन यह साबित किया है कि अगर मजदूर कमर कसकर खड़े हो जाएं तो अत्याचारी सरकार को झुकाना कठिन काम नहीं है।
मौके पर अधिवक्ता सरफ़राज़ अहमद ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता वर्तमान सरकार द्वारा बदला जा रहा है,और पुराने कानूनों को खत्म करने में लगा हुआ है। लेकिन वास्तव में, यह इतना दमनकारी कानून है कि सरकार विरोधी प्रदर्शन जैसी एक लोकतांत्रिक कार्यवाही को भी आतंकवादी गतिविधि बताया जाएगा और आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत असहमत लोगों को सलाखों के पीछे डाल दिया जाएगा। यह कानून, बीएनएस 143 विपक्षी सांसदों को संसद से बाहर निकालने के बाद लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाते हुए मोदी सरकार ने हाल के शीत सत्र में संसद से पास कराया है। डर का माहौल बनाने, विपक्ष व असहमति की आवाज को चुप कराने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दबाने के लिए लेखकों, बुद्धिजीवियाँ, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्ष के सदस्यों को ईडी, सीबीआई, एनआईए जैसी सरकारी एजेंसियों और यूएपीए, राजद्रोह, आदि जैसे कानूनों के खुलेआम दुरुपयोग के जरिए निशाना बनाया जा रहा है।
इस दौरान सेमिनार में प्रोफेसर शिव कुमार यादव, जनार्दन प्रसाद, रसोइया संघ के रेणु देवी, बिक्की डोम, शंकर प्रसाद, किशोर साव, सुभाष शर्मा, मनोज रविदास, महेंद्र प्रसाद, सुनील पासवान, शिवन रविदास, लखन लाल, अखिलेश पंडित, दीपक कुमार सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
कृपया कमेंट बॉक्स में कोई भी स्पैम लिंक न डालें - शंखनाद