मोगलकुआं के ऐतिहासिक गुरुद्वारे में श्रीगुरु नानक देव की जयंती मनाई गई...!!
●गुरुनानक देव जी का 557 वाँ प्रकाश पर्व, गुरुद्वारा में आयोजित हुए कार्यक्रम
● गुरुनानक देव जी ने जीवन-भर ईश्वरीय ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया
● श्रीगुरु नानक देव जयंती मनाई, शबद कीर्तन से संगत को गुरुनानक के बताए रास्ते पर चलने का दिया संदेश
बिहारशरीफ, मोगलकुआं 09 नवम्बर : (विक्रम संवत् 2082) को श्रीगुरुनानक देव जी शाही संगत मोगलकुआँ-बिहारशरीफ में बिहार सिख फेडरेशन पटना साहिब के तत्वावधान में बड़े ही श्रद्धाभाव के साथ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पटना साहिब एवं स्थानीय सिख संगत के सहयोग से श्री गुरु नानक देव जी महाराज का 557 वाँ प्रकाश पर्व मनाया गया। जिसकी अध्यक्षता बिहार सिख फेडरेशन पटना साहिब के संस्थापक भाई त्रिलोक सिंह निषाद जी ने किया। इस अवसर पर गुरुद्वारा परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया, जहां भक्ति और सेवा की भावना का सुंदर संगम देखने को मिला।
मौके पर बिहार सिख फेडरेशन नालंदा के अध्यक्ष भाई सरदार वीर सिंह, शंखनाद के महासचिव सह सिख फेडरेशन के मीडिया प्रभारी एवं प्रवक्ता राकेश बिहारी शर्मा, गुरुद्वारा के ग्रंथी भाई रवि सिंह ने राग में राग मिलाकर शबद कीर्तन किया।
मौके पर अध्यक्षता करते हुए बिहार सिख फेडरेशन पटना साहिब के संस्थापक भाई त्रिलोक सिंह निषाद जी ने बताया कि सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम सिख गुरु श्री गुरु नानक देव जी 1507 ईं में पंजाब, बनारस, काशी, गया, राजगीर होते हुए बिहारशरीफ की ऐतिहासिक धरती पर कदम रखा और मोगलकुआँ संगत को स्थापित किया था। यह गुरुद्वारा बिहारशरीफ के पंचाने नदी के तट पर श्री गुरुनानक देव जी शाही संगत के नाम से स्थित है। गुरु नानक देव जी एक कवि, एक घुमक्कड़ धार्मिक शिक्षक, एक महान समाज सुधारक और दस सिख गुरुओं में से पहले गुरु थे। उन्होंने गुरु नानक देव जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान करते हुए सदमार्ग पर चलने का संदेश दिया। गुरु नानक देव जी ने एक पंगत, एक संगत का उदाहरण देकर समाज में समरसता और समानता की भावना जागृत की। उन्होंने जात-पात, पाखंड और रूढ़िवाद की बेड़ियों से बाहर निकलने का आह्वान किया।
बिहार सिख फेडरेशन नालंदा के मीडिया प्रभारी एवं शंखनाद के महासचिव राकेश बिहारी शर्मा ने श्रोताओं का ध्यान आकर्षित करते हुए धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने में सिख धर्म के संस्थापक के योगदान पर प्रकाश डाला, क्योंकि पूज्य गुरु ने अपने जीवनकाल में ही धार्मिक आधार पर विभाजन को खत्म करने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा- आज हम लोग गुरुनानक देव जी की 557 वीं जयंती प्रकाश पर्व के रूप में मना रहे हैं। गुरुनानक जी सिर्फ सिक्खों के गुरु नहीं हैं बल्कि सभी धर्मों के लोग उन्हें मानते हैं। क्योंकि उन्होंने सभी संप्रदाय के लोगों के लिए धर्म की बातें बताई हैं।
शेर शाह सूरी के सोलहवें वंशज मो. तुफैल अहमद खाँ सूरी ने कहा- श्री गुरुनानक देव जी ने जीवन-भर ईश्वरीय ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया। धर्म का सही ज्ञान लोगों को कराया। हिन्दू-मुस्लिम समान रूप से उनके भक्त बन गये थे। समानतावादी समाज की स्थापना की। उन्होंने प्रेम और शांति का जो संदेश लोगों को दिया, वह आज भी प्रासंगिक है।
बिहार सिख फेडरेशन नालंदा के अध्यक्ष सरदार भाई वीर सिंह ने कहा कि श्रद्धालुओं के लिए लंगर की भी व्यवस्था है, जहां वे प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। कीर्तन के जरिए गुरुनानक जी के बताये मार्ग पर चल कर अपने जीवन को सफल बनाने का संदेश दिया।
शंखनाद के अध्यक्ष इतिहासज्ञ प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह ने कहा- नानक जी सिख धर्म के संस्थापक और पहले सिख गुरु थे। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी को इतिहास के सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु में से एक माना जाता है. समानता, प्रेम, विनम्रता और निस्वार्थ पर जोर देने वाली गुरु नानक जी की शिक्षाएं दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करती हैं।
कार्यक्रम की समाप्ति के बाद प्रसाद वितरण और सामूहिक लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। संगत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने नानक देव जी के संदेशों को आत्मसात किया। उनके संदेशों में अपने हाथों काम करना, मिल बांटकर खाना और प्रभु ईश्वर का नाम जपना है।
मौके पर फेडरेशन के महासचिव सतनाम सिंह, मानवाधिकार संघ के सदस्य डॉ.आनंद मोहन झा, तख्त हरि मंदिर साहिब के प्रबंधक दिलीप सिंह पटेल, धीरज कुमार, नवनीत कृष्ण, रणजीत सिंह, परमजीत सिंह, रागी सुखवंत सिंह, ह्रदय सिंह, हरिनारायण सिंह,संजय सिंह, स्वारथ सिंह, रणवीर सिंह, बुद्धा सैनिक ट्रेंनिग सेंटर के प्रबंधक दीपक कुमार, सुरेंद्र प्रसाद शर्मा, सुमित बिहारी, कमल प्रभाकर, चिंता कौर, प्रियंका कौर सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे। पूरे दिन गुरुद्वारा परिसर में वाहे गुरु का खालसा, वाहे गुरु की फतह के जयघोष गूंजते रहे।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
कृपया कमेंट बॉक्स में कोई भी स्पैम लिंक न डालें - शंखनाद