शिक्षक नेता के निधन पर ककड़िया में श्रद्धांजलि सभा.....!"

नूरसराय, ककड़िया 05 जनवरी 2026 : प्रखंड के मध्य विद्यालय ककड़िया के प्रांगण में सोमवार को एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह सभा शिक्षक संघ के वरीय नेता शिक्षाविद राकेश बिहारी शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें बिहार ही नहीं अपितु देश की शिक्षक राजनीति के महायोद्धा बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के अजेय राज्य अध्यक्ष और अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के भवन ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक नेता ब्रजनंदन शर्मा के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया।  
मौके पर श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए शिक्षाविद राकेश बिहारी शर्मा ने ब्रजनंदन शर्मा के व्यक्तित्व और उनके संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि शिक्षा जगत और शिक्षकों के हितों की रक्षा में शर्मा जी का योगदान अविस्मरणीय है। स्वर्गीय बृजनंदन शर्मा ने अपने पूरे जीवनकाल में शिक्षकों के हित, सम्मान और अधिकार के लिए निरंतर संघर्ष किया। उन्होंने न केवल शिक्षकों की समस्याओं को मजबूती से उठाया, बल्कि संगठन को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। स्वर्गीय श्री शर्मा 1967 में बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष बने थे तब से लगातार अब तक 58 वर्षों तक लगातार निर्विरोध वे बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रहे। ज्ञातव्य हो कि न सिर्फ राज्य न सिर्फ देश बल्कि उनकी ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थी विश्व विश्व भर के प्राथमिक शिक्षकों का एकमात्र संगठन एजुकेशन इंटरनेशनल के भी वे संस्थापक सदस्य भी थे। साथ ही साथ अखिल भारतीय शैक्षिक संघ के भी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को सुशोभित करते रहे। बृजनंदन शर्मा पांच पुत्र एवं दो पुत्रियों के पिता थे। जहानाबाद के पूर्व सांसद डॉ अरुण कुमार, टेकारी के पूर्व विधायक सह पूर्व मंत्री डॉ अनिल कुमार इन्हीं के दोनों सुपुत्र हैं। घोसी विधानसभा क्षेत्र के विधायक ऋतुराज कुमार एवं अतरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक रोमित कुमार बृजनंदन शर्मा के ही पौत्र हैं। उनके निधन से शिक्षण जगत को अपूर्णीय क्षति हुई है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने कहा- स्वर्गीय बृजनंदन शर्मा ने ऐसे दौर में शिक्षक आंदोलन को दिशा दी, जब शिक्षकों की सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक सुरक्षा दोनों ही चुनौतियों से घिरी थीं। केंद्रीय वेतनमान से लेकर शिक्षकों को मान-सम्मान दिलाने तक, कई ऐतिहासिक उपलब्धियां उनके नेतृत्व से जुड़ी रहीं। यह उनकी ही संगठनात्मक क्षमता थी कि उनके एक आह्वान पर शिक्षक आंदोलन “करो या मरो” की तर्ज पर खड़ा हो जाता था और सरकार को संवाद के लिए मजबूर होना पड़ता था। आंदोलन की घोषणा मात्र से सत्ता के गलियारों में हलचल मच जाना, उनके प्रभाव का प्रत्यक्ष प्रमाण था। उनकी उम्र कभी उनके संकल्प के आड़े नहीं आई। बृजनंदन शर्मा का 4 जनवरी 2026 दिन रविवार की अहले सुबह अपने सुपुत्र, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सह हम सेकुलर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार के पटना स्थित आवास 15, हार्डिंग रोड पर अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार देर शाम दीघा घाट पर किया गया। स्वर्गीय शर्मा अपने पीछे एक सशक्त सामाजिक एवं राजनीतिक विरासत वाला परिवार छोड़ गये हैं।
इस अवसर पर प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार मेहता ने कहा कि उनके निधन से शिक्षक आंदोलन को गहरा आघात पहुंचा है। वह सिर्फ शिक्षक नेता ही नहीं थे, बल्कि शिक्षकों के राजनीतिक और वैचारिक मार्गदर्शक भी थे।
इस दौरान विद्यालय के शिक्षक सर्वश्री अनुज कुमार, अरविन्द कुमार शुक्ला, रणजीत कुमार सिन्हा, सतीश कुमार, सुरेश कुमार, विश्वरंजन कुमार, मो. रिज़वान अफताब, शिक्षिका पूजा कुमारी, अनीता कुमारी, मुकेश कुमार, रामजी चौधरी तथा विद्यालय परिवार के सदस्य समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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