स्वतंत्रता सेनानी डॉ. रामस्वरूप शर्मा की जयंती पर बांटे गए कंबल.....!!

●बबुरबन्ना में कंबल वितरण किया गया: सैकड़ों जरूरतमंदों को कड़ाके की ठंड से मिली राहत

●असहाय लोगों के बीच किया गया कंबल का वितरण
सोहसराय-बबुरबन्ना 14 जनवरी 2026 : सोहसराय क्षेत्र के साहित्यिक भूमि बबुरबन्ना मोहल्ले में बिहारी निवास स्थित सभागार में शंखनाद साहित्यिक मंडली के तत्वावधान में 14 जनवरी 2026 दिन बुधवार को शंखनाद के अध्यक्ष साहित्यकार प्रोफेसर (डॉ.) लक्ष्मीकांत सिंह की अध्यक्षता में शंखनाद साहित्यिक मंडली के महासचिव की पत्नी श्रीमती सविता बिहारी के सौजन्य से अपने ससुर समाजसेवा के अप्रतिम प्रतीक स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय डॉ. रामस्वरूप शर्मा की 102 वीं जयंती पर बृद्ध महिलाओं, समाजसेवियों एवं अभावग्रस्त लोगों के बीच कड़ाके की ठंड में कंबल वितरण कर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसका संचालन शंखनाद के मीडिया प्रभारी राष्ट्रीय शायर नवनीत कृष्ण ने किया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय डॉ. रामस्वरूप शर्मा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
मौके पर शंखनाद के महासचिव राकेश बिहारी शर्मा ने पिताजी के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मेरे पिताजी स्वर्गीय रामस्वरूप शर्मा जी सक्रिय एवं निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी थे, लेकिन हमेशा गुमनाम ही रहे। और आजादी के बाद अपने मित्रों एवं सहयोगियों के कहने पर शिक्षक प्रशिक्षण लेकर शिक्षक की नौकरी कर ली। ये स्वतंत्रता आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर नुक-छिप कर कई आंदोलनों में इन्होने भाग लिया था। ये असहायों की मदद करने को हमेशा सक्रिय रहते थे। घर के सभी लोग आंदोलनकारियों को मदद किया करते थे। पिताजी को क्रांतिकारी विचारधारा विरासत में मिली थी। घर के बगल दालान में स्वतंत्रता सेनानियों का जमाबड़ा लगा रहता था। उन्होंने कहा- धन्य हैं वे पुत्र जिनकी माता और पिता आज उनके साथ हैं और मार्गदर्शन कर रहे हैं। हम सभी व्यक्तियों का कर्तव्य बनता हैं की माता-पिता की सेवा लगन से करें और उनके पदचिन्हों पर चलें। माता-पिता के मुख से निकला हुआ आशीर्वाद जन्म जन्मांतर तक साथ देता है। वर्तमान समय में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने माता-पिता की सेवा न कर वृद्ध आश्रम में छोड़ देते हैं।
अध्यक्षता करते हुए शंखनाद के अध्यक्ष एवं प्रदेश के प्रख्यात् इतिहासज्ञ डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह ने कहा कि जरूरतमंद लोगों की मदद से बढ़कर कोई पुनीत कार्य नहीं है। समाज के लोगों को जरूतरतमंदों की मदद में आगे आना चाहिए। शंखनाद साहित्यिक मंडली के सदस्य हर पल गरीब जरूरतमंद की मदद के लिए नि:स्वार्थ भाव से खड़े रहते हैं। हमारी कोशिश रहेगी कि हम निरंतर जरूरमंद लोगो की मदद करें। इंसान के मन में समाजसेवा का भाव होना बेहद जरूरी है। पिताजी के जयंती समारोह में जरुरतमंद को कंबल देने की यह पहल बहुत ही सराहनीय है।
मौके पर बहुभाषाविद साहित्यकार बेनाम गिलानी ने कहा कि समाज में सक्रीय रहने वाले सभी व्यक्तियों का समाजसेवा करना दायित्व है। मानव के मन में समाजसेवा का भाव होना बेहद जरूरी है। अपने लिए तो हर कोई जीवन व्यतीत करता है, लेकिन दूसरों के लिए भी जीना चाहिए। समाज सेवा का जज्बा यदि इंसान के अंदर हो तब वह किसी भी मुश्किल का सामना कर सेवा कर ही लेता है। हम तन-मन धन सभी तरह से समाज की सेवा कर सकते हैं।
मौके पर समाजसेविका सविता बिहारी ने कहा- मैं अपने ससुर स्वर्गीय रामस्वरूप शर्मा के 102 वीं जयंती को यादगार बनाने का काम कर रही हूँ। हर साल अपने ससुर के स्मृति में जरूरमंद लोगों की बीच ठंड में कंबल और अंगवस्त्र का वितरण करते हैं। उन्होंने कहा कि मानवता ही सबसे बड़ी सेवा है। वह सभी की सेवा के लिये सदैव तत्पर रहते थे। हर सामर्थ्य वान लेगों को इस दिशा में आगे आने की जरूरत है। यदि अन्य  लोग मानवता की सेवा के लिए आगे आए तो असहाय और जरूरतमंद लोगों का दुख कम होगा। उन्होंने कहा- असहायों की सेवा से मन और आत्मा को शांति मिलती है।
 मौके पर वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अरुण कुमार मयंक ने कहा कि समाज के सक्षम लोगों को अपनी छोटी-बड़ी खुशियां समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंदों के साथ साझा करनी चाहिए। सच्ची खुशी वही होती है जिससे दूसरों के चेहरे पर मुस्कान ला सके और मानवता की मिशाल बने।  
 हास्य व्यंग्य कवि तंगय्यूवी ने कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक होता है, जब वह गरीब और असहायों की मदद करता है। सर्दी के इस मौसम में गर्म कपड़े वितरण करना सच्ची मानव सेवा है और ऐसे कार्यों से समाज में एक सकारात्मक बदलाव आता है।
मौके पर डॉ. रजनीश बिहारी शरण ने अपने संबोधन में कहा कि आज समाज में बिगड़ते ताने-बाने में वृद्ध लोगों को सहयोग की ज्यादा जरूरत महसुस होती है और ऐसी स्थिति में पुत्र द्वारा अपने पिता की जयंती पर सभी वृद्ध लोगों का संमान किया जाना समाज के अन्य युवाओं के लिए प्ररेणादायक है। आज समाज में पैसे का महत्व बढ़ने से वृद्ध लोगों का संमान परिवारों में खत्म होने लगा है, इसलिए ऐसी समाजिक संस्थाओं का आगे आने से वृद्धों को होने वाली आहत से दूर रखा जा सकता है।
मौके पर शंखनाद के कोषाध्यक्ष समाजसेवी सरदार वीर सिंह ने कहा कि इस तरह से श्रद्धांजलि देने के तरीके को प्रशंसा करते हुए कहा- यह समारोह अपने दिवंगत पिता को याद करने और उन्हें सम्मान देने का एक भावुक और परोपकारी तरीका है, जहाँ उनकी जयंती को इस रूप में मनाया जाता है।
इसके अलावा मकर संक्रांति के अवसर पर लोगों को चूड़ा, गुड़ और तिलकुट भी दिया। गरीब असहाय लोगों को कंबल देने से एक अलग ही अनुभूति होती है।
इस अवसर पर समाजसेवी अरुण बिहारी शरण, समाजसेवी धीरज कुमार, सुमित बिहारी, पूजा बिहारी, स्वाति कुमारी, पत्रकार सोनू कुमार, मंती देवी, सुजल बिहारी, देवांश बिहारी, श्यामा देवी, पंचा देवी, कोशिला देवी, मीना देवी, आरती देवी, चंद्रमणि देवी,  साबो देवी, सुखिया देवी, सुदामी देवी, मनोरमा देवी, रूबी देवी, कुलवंती देवी, चमेली देवी, कारी देवी, मारो देवी, अनीता देवी समेत सैकड़ो महिला-पुरुष मौजूद थे।

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