सामाजिक समरसता के प्रतीक थे कर्पूरी ठाकुर.....!!

● जननायक कर्पूरी ठाकुर ने राजनीति को जनसेवा का माध्यम माना :  
● सामाजिक समरसता के प्रतीक थे कर्पूरी ठाकुर :
● नाई संघ ने मनाई कर्पूरी ठाकुर की जयंती :
बिहारशरीफ, 28 जनवरी 2026 : अखिल भारतीय नाई संघ ट्रेड यूनियन नालंदा की ओर से 27 जनवरी दिन मंगलवार को देर शाम बिहारशरीफ के पालिका बाजार स्थित शिव मंदिर सामुदायिक भवन में जिलाध्यक्ष रंजीत कुमार शर्मा की अध्यक्षता एवं जिला संयोजक राकेश बिहारी शर्मा के मंच संचालन में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102 वीं जयंती समारोह श्रद्धापूर्वक मनाई गई। समारोह में संघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने कर्पूरी ठाकुर के तस्वीर पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर शुभारंभ किया।
मौके पर अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष रंजीत कुमार शर्मा ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर नेता नहीं बल्कि विचार थे। कर्पूरी ठाकुर के आदर्शों पर चलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1952 में पहली बार विधानसभा का चुनाव जीते थे। वे बिहार के शिक्षा मंत्री रहे थे। 1967 में पहली बार उपमुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म की थी। और उर्दू को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया था। वर्ष 1977 में मुख्यमंत्री बनने पर देश में पहली बार OBC आरक्षण दिया। और पांच एकड़ तक की जमीन पर मालगुजारी खत्म कर दिया था। 
सामाजिक समरसता के प्रतीक थे कर्पूरी ठाकुर :

मौके पर मंच संचालन करते हुए संयोजक राकेश बिहारी शर्मा ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नाई समाज भारतीय संस्कृति के संवाहक हैं। इसके बिना समाज में सामाजिकता का काम नहीं चल सकता है। भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी ने राजनीति भी समाज के विकास की भावना से किये। वे किसी खास जाति के लिए नहीं बल्कि सभी जातियों के लिए कार्य किये। उन्होने बिहार के विकास के लिए कई ठोस कदम उठाकर प्रदेश का नाम देश में ही नही विदेशों तक पहुचाने का कार्य किये। इसलिए उन्हे जन-जन के नेता जननायक कहा जाता है। जननायक कर्पूरी ठाकुर निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी, महान विचारक, कुशल राजनीतिज्ञ, सामाजिक समरसता के प्रतीक और गरीब-शोषितों के मसीहा थे। बिहार के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के प्रयास से भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न कि उपाधी दी। वे बिहार के दूसरे उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने कहा- समाज के सभी लोग शिक्षा को प्राथमिकता दें, शिक्षा पाकर ही हम अपने अधिकार को प्राप्त कर सकते हैं। जननायक कर्पूरी ठाकुर अपने राजनीति जीवन में पिछड़ा व अति पिछड़ा समाज के लिए महत्वपूर्ण कार्य किये। इसलिए प्रति वर्ष उनका जयंती हर दल व संगठन के द्वारा मनाया जाता है।
मौके पर राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन के संघर्षशील पदाधिकारी मकसूदन शर्मा ने कहा कि के विचारों को जिंदा रखने के लिए समाज की नई पीढ़ी के युवाओं को आगे आना होगा। तभी हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर पाएंगे। कर्पूरी ठाकुर हमेशा मुखर होकर सामंतवादी और जाति धर्म के नाम पर उन्माद फैलाने वाले लोगों के खिलाफ हमेशा आवाज बुलंद किया करते थे।
इस मौके पर संघ के उपाध्यक्ष रंजीत कुमार अकेला, अरुण बिहारी शरण, विक्रम कुमार, चंदन कुमार, राकेश कुमार,  बबलू शर्मा, अशोक ठाकुर, संतोष कुमार शर्मा, मुरारी कुमार, सूरज ठाकुर, सुधीर कुमार, भाषो ठाकुर, उमेश शर्मा, रामप्रवेश ठाकुर, मुन्ना शर्मा, विजय कुमार, भोला ठाकुर, नंदकिशोर कुमार, जनार्दन ठाकुर, सुरेंद्र प्रसाद, श्रवन शर्मा, अनिल कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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