साहित्यकार रामचंद्र ‘अदीप’ की 12 वीं पुण्यतिथि पर विचार गोष्ठी: शंखनाद के साहित्यकारों व कवियों ने रचनाओं के जरिए दी श्रद्धांजलि

साहित्यकार रामचंद्र प्रसाद ‘अदीप’ की 12 वीं पुण्यतिथि मनाई गई

●पुण्यतिथि पर याद किए गए मगही भाषा के ध्वज वाहक रामचंद्र ‘अदीप’  
●रामचंद्र प्रसाद अदीप की पूण्यतिथि पर साहित्यिक गोष्ठी
●अदीप जी एक सफल गज़लकार एवं एक सफल कथाकार थे
●रामचंद्र “अदीप”ग्रामीण व शहरी कथाकारों में से एक थे
बिहारशरीफ 4 फरवरी 2026 : स्थानीय बिहारशरीफ-छोटी पहाड़ी स्थित साहित्यसेवी रामसागर राम जी के आवास पर 4 फरवरी दिन बुधवार को  शंखनाद साहित्यिक मंडली के तत्वावधान में हिन्दी, मगही एवं भोजपुरी के प्रख्यात साहित्यकार रामचंद्र प्रसाद ‘अदीप’ की 12 वीं पुण्यतिथि पर शंखनाद के अध्यक्ष साहित्यकार डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह की अध्यक्षता में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन शायर नवनीत कृष्ण ने किया।
इस अवसर पर साहित्यकारों, साहित्यप्रेमियों तथा शहर के कई गणमान्य लोगों ने सर्वप्रथम रामचंद्र प्रसाद ‘अदीप’ के तैलचित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद ‘अदीप’ जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा शुरू हुई। 
 
मौके पर शंखनाद के महासचिव राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा देने वाले, हिंदी और मगही साहित्य के महान साहित्यकार रामचंद्र प्रसाद अदीप जी को एक निर्भीक लेखक माना जाता है, जिन्होंने ग्रामीण व शहरी कथाओं को अपने लेखन में अच्छी तरह से समाहित किया था। उनके कृतियों में एक ग्रामीण सार है, क्योंकि इनमें साधारण परिवारों, शहरों से बहुत दूर प्रकृति की गोद में, नदियों, पेड़ों और कृषि भूमि के बीच के जीवनकाल को कहानियों के रूप में दर्शाया गया है। उन्होंने अपनी रचनाओं में धर्म के नाम पर हो रहे सामाजिक भेदभाव, अन्याय और अंधविश्वास के खिलाफ विरोध किया है। 
उन्होंने अदीप जी के बारे में बताते हुए कहा कि साहित्यकार रामचंद्र प्रसाद ‘अदीप’ जी का जन्म 2 जनवरी 1940 ई० में बिहारशरीफ के कबरूद्दीनगंज मोहल्ले में हुआ था। इनके पिता का नाम वैद्यनाथ प्रसाद तथा इनकी माता स्व० मुन्ना देवी तथा धर्म पत्नी चंद्रकांता देवी थी। नालंदा के कलमजीवी, कवि, सफल कलाकार 'अदीप' जी मगध संघ के साहित्य मंत्री, नालन्दा जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के संस्थापक कलामंत्री व उपाध्यक्ष, लायंस क्लब, बिहारशरीफ के अध्यक्ष, बिहार क्लब, बिहारशरीफ संगठन मंत्री, पुराना पत्रकार, अब तिमाही मगही के सम्पादक मंडल के सदस्य रहे।
रामचंद्र प्रसाद “अदीप” के 'तीसरी नजर' हिंदी कहानी संग्रह, 'विखरइत गुलमासा (मगही कहानी संग्रह) 'कथा धउद' (मगही कथा संग्रह) रचना (वाराणसी) प्रगतिशील समाज, मगध सुमन, मार्जर, सारथी, गमला में गाछ, मगही-हिंदी आदि में कहानी प्रकाशित हुए। तिमाही मगही के प्रवेशांक में संकलित कहानी 'सिलसिला' में सामंती जीवन से संबन्धित कथा जो मगही साहित्य में मगध विश्वविद्यालय के स्नातक कोर्स में संचालित है।'अदीप' जी में सादगी, सरलता, त्याग, स्वावलंन, सदृढता, विनम्रता एवं उदारता कूट-कूट कर भरी हुई थी। साहित्यकार रामचंद्र प्रसाद अदीप जी कलम के मजदूर नहीं, कलम के अनूठे जादूगर और छंद के अद्वितीय ज्ञाता थे।
मौके पर सभा को संबोधित करते हुए शंखनाद के अध्यक्ष साहित्यकार प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह ने कहा कि अदीप जी का साहित्य आज भी मानव को मानव बनाने की प्रेरणा देने का सशक्त माध्यम है। अदीप जी ऐसे रचनाकार रहे जिनके लिए मूल्यों का संरक्षण सबसे बडी साधना रहा है। अदीप जी ने अपनी साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से मानवता, सत्य और नैतिकता के मूल्यों को जीवंत रखा। उनके साहित्य में ग्रामीण जीवन, सामाजिक समानता और राष्ट्रप्रेम की झलक मिलती है। अदीप जी हिंदी-मगही साहित्य के अमर पुंज हैं।
  प्रोफेसर शकील अहमद अंसारी ने कहा कि अदीप जी की रचनाओं में व्यक्ति-वेदना, राष्ट्र-वेदना और जीवन-दर्शन के स्वर मिलते है।
 समाजसेवी रामप्रसाद सिंह ने साहित्य पर बाजारवाद के प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि मौलिक रचनाओं और रचनाकारों को समुचित महत्व मिलना चाहिए।
शिक्षाविद राजहंस ने कहा कि अदीप जी का व्यक्तित्व बहु-आयामी था। वे एक मर्म-स्पर्शी कवि, साहित्यकार, समर्पित रंगकर्मी, मंच संचालक और हिंदी-मगही लेखक थे।
कवि कामेश्वर प्रसाद ने कहा – रामचंद्र प्रसाद अदीप जी के साहित्यिक व्यक्तित्व को गढ़ने में उनके मित्र मंडली की अहम भूमिका रही।  
 सभा को सम्बोधित करते हुए शायर नवनीत कृष्ण ने कहा कि रामचंद्र प्रसाद अदीप जी का साहित्य आज भी युवा पीढी के लिये प्रेरणा का स्त्रोत बना हुआ है। 
इस अवसर पर शायर अमन कुमार, अमित कुमार यादव,धीरज कुमार, अरुण बिहारी शरण, सुमित बिहारी, श्याम बिहारी, माला देवी, स्नेहा राधा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।के
अंत में आभार ज्ञापन शिक्षाविद रामसागर राम ने किया।

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