सोहसराय के बबुरबन्ना में क्रांतिकारी जयंती का गूंजा शंखनाद....!
●भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के विस्मृत वीरांगना हैं नीरा आर्य
●सुभाष चंद्र बोस को बचाने के लिए पति को मार डाला था जुनूनी नीरा ने
●भारत के स्वतंत्रता संग्राम की एक निडर अग्रणी सेनानी थी नीरा आर्य
बिहारशरीफ-बबुरबन्ना, 5 अप्रैल 2026 : स्थानीय साहित्यिक भूमि बबुरबन्ना स्थित सविता बिहारी निवास में शंखनाद साहित्यिक मंडली के तत्वावधान में शंखनाद के अध्यक्ष साहित्यकार प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह की अध्यक्षता में भारत के महान देश भक्त क्रांतिकारी नीरा आर्य की 124 वीं जयंती समारोह मनाई गई। जिसका संचालन शंखनाद के मीडिया प्रभारी शायर नवनीत कृष्ण ने किया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह, महासचिव राकेश बिहारी शर्मा, पत्रकार अरुण कुमार मयंक एवं प्रोफेसर डॉ. शकील अहमद अंसारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन एवं नीरा आर्य के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया।
मौके पर शंखनाद के महासचिव साहित्यकार राकेश बिहारी शर्मा ने कार्यक्रम का विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि आज हम सभी इस पावन अवसर पर एकत्रित हुए हैं, जहाँ हम महान क्रांतिकारी नीरा आर्य की जयंती मना रहे हैं। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस, त्याग और देशभक्ति को नमन करने का दिन है, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। नीरा आर्य का जीवन हमें सिखाता है कि देश के लिए जीना ही नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर अपने सर्वस्व का बलिदान करना ही सच्ची देशभक्ति है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से कभी मुंह नहीं मोड़ा। उनका साहस और संघर्ष हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आज का समय हमसे केवल इतिहास को याद करने की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान करता है। जब हम नीरा आर्य जैसे महान व्यक्तित्व को याद करते हैं, तो हमें यह भी संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाएंगे। शंखनाद संस्था हमेशा से राष्ट्र जागरण और सामाजिक चेतना के लिए कार्य करती रही है। हमारा उद्देश्य केवल कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। हमें शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रप्रेम के माध्यम से एक सशक्त भारत का निर्माण करना है।
मौके पर डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि ऐसे महान क्रांतिकारियों की जयंती मनाना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने का अवसर है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देशहित को सर्वोपरि मानते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लें। अंत में, मैं शंखनाद परिवार की ओर से आप सभी का हार्दिक धन्यवाद करता हूँ कि आपने अपनी उपस्थिति से इस कार्यक्रम को सफल बनाया।
समारोह में प्रखर पत्रकार अरुण कुमार मयंक ने कहा कि मैं विशेष रूप से युवाओं से कहना चाहता हूँ-आप ही इस देश का भविष्य हैं। यदि आप अपने भीतर देशभक्ति की भावना, अनुशासन और समर्पण को विकसित करेंगे, तो भारत को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा- आइए, हम सभी मिलकर आज यह संकल्प लें कि हम अपने महान क्रांतिकारियों के सपनों का भारत बनाएंगे-एक ऐसा भारत जो मजबूत, आत्मनिर्भर और संस्कारवान हो।
मंच संचालन करते हुए मीडिया प्रभारी शायर नवनीत कृष्ण ने कहा कि नीरा आर्य देश की पहली महिला जासूस थी। देश को आजादी मिलने के बाद नीरा आर्य ने हैदराबाद में सड़क किनारे फूल बेचकर गुमनाम, दयनीय और असहाय जीवन व्यतीत किया, लेकिन उन्होंने किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता या पेंशन स्वीकार नहीं की।
शंखनाद के कोषाध्यक्ष भाई सरदार वीर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता के प्रति जुनूनी नीरा ने , नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित आज़ाद हिंद फौज की रानी झाँसी रेजिमेंट की नायिका थी। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और आजाद हिंद फौज के हिस्से के रूप में भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी।
इस दौरान शिक्षाविद् राजहंस कुमार, समाजसेवी अमर सिंह, समाजसेविका सविता बिहारी, आनंद बिहारी, सुमित बिहारी, स्वाति कुमारी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
कृपया कमेंट बॉक्स में कोई भी स्पैम लिंक न डालें - शंखनाद