12 वीं अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर विशेष ...!!

लेखक :- साहित्यकार राकेश बिहारी शर्मा, महासचिव शंखनाद साहित्यिक मंडली

झरने सी चंचल, नदी सी निर्मल होती हैं लडकियां, श्री की छवि, शक्ति का स्वरूप होती हैं लडकियां, नेह की शीतल छांव हैं, कभी कोमल, कभी शौर्य का प्रतीक होती हैं लडकियां।
भले ही हम कितना ही कह लें कि लड़के और लड़कियों के बीच हमारे समाज में भेदभाव नहीं होता है। लेकिन आज भी समाज में ऐसी कई घटनाएं सामने आती हैं, जहां बालिकाओं के जन्म से लेकर पालन पोषण के दौरान, शिक्षा में, काम के दौरान हमेशा लड़कों से कम समझा जाता है। ऐसे में उनके अधिकार और उन्हें सम्मान देने के लिए और इस बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए हर साल अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। जब लड़कियों को शिक्षित किया जाता है, तो उनका देश मजबूत और अधिक समृद्ध होता हैं।
लडकियां घर की चिराग नहीं रौशनी होती है। उनके होने भर से परिवार में खुशहाली बनी रहती है। शादी से पहले लडकियां अपने घर और फिर शादी के बाद ससुराल को संवारती हैं। लडकियां घर की उत्सव होती हैं। लड़कियों से घर परिवार की रौनक होती है। लड़कियों को रंगोली, अल्पना के रूप में भी देखा जा सकता है, जो घर की सुंदरता को बढ़ाती हैं। लड़कियों को घर की लक्ष्मी कहा जाता है। जिस घर में लडकियां होती हैं, जहां हमेशा खुशियां रहती हैं। घर में चहल-पहल बनाए रखने वाली लड़कियों की हंसी से पूरा घर पर गूंजता रहता है। हालांकि, आज भी कई जगह लड़कियों को लडकों से कम आंका जाता है। आज भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो लडकी के जन्म पर खुश नहीं होते, क्योंकि उनका ऐसा मानना है कि लडकियाँ पराई होती हैं और लडके वंश आगे बढ़ाने वाले होते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का इतिहास 

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 11 अक्टूबर को मनाया जाता है, यह दिन लड़कियों के अधिकारों और उनकी स्थिति को सुधारने के लिए समर्पित है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत 19 दिसंबर, 2011 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 66/170 को पारित कर 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस घोषित किया, ताकि लड़कियों के अधिकारों और दुनिया भर में लड़कियों के सामने आने वाली चुनौतियों को मान्यता दी जा सके। पहला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर 2012 को मनाया गया, जिसका मुख्य विषय था ‘बाल विवाह की समाप्ति’। तब से हर साल यह दिवस अलग-अलग सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित होता है, जैसे बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, हिंसा से सुरक्षा और तकनीकी सशक्तिकरण।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का उद्देश्य

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का मुख्य उद्देश्य लड़कियों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, और सुरक्षा के मुद्दों को उजागर करता है, इसके माध्यम से समाज को यह समझाने का प्रयास किया जाता है कि लड़कियों का सशक्त होना आवश्यक है। इसके अलावा यह दिन लड़कियों के प्रति भेदभाव और हिंसा के खिलाफ एक मजबूत संदेश भेजता है। इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो लड़कियों के लिए एक बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाने में मदद करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 2024 का थीम 

किसी भी दिवस को मनाने के लिए एक थीम निर्धारित की जाती है। ऐसे ही अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस एक निर्धारित थीम के साथ मनाया जाता है। पिछले वर्ष 2023 में इस दिवस की थीम ‘लड़कियों के अधिकारों में निवेश करें: हमारा नेतृत्व, हमारा कल्याण’ रखी गई थी। वर्ष 2024 में इस दिन की थीम 'भविष्य के लिए बालिकाओं का दृष्टिकोण' तय की गई है।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का महत्व 
 
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का महत्व लड़कियों के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करना है। यह दिन समाज में लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दों को उजागर करता है। इसके माध्यम से समाज को यह समझाने की कोशिश की जाती है कि लड़कियों का विकास और सशक्त होना सभी के लिए लाभकारी है। यह दिन एक ऐसा मंच प्रदान करता है जहां लड़कियां अपनी आवाज उठा सकती हैं। इस प्रकार यह दिन सकारात्मक बदलाव लाने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।

लड़कियों को आगे बढ़ने का मौका दें, ताकि वो आसमान छू सके

समाज  में लड़कियों को आगे बढ़ने के लिए उनके पंखों को काटना नहीं बल्कि उनको नए पंख देने चाहिए। ताकि वो आसमान तक छू सके और अपना और अपने देश का नाम भी रोशन कर सके। लड़कियां कमजोर नहीं होती हैं, बल्कि उनको एक मौके की तलाश होती है। जो उनको समाज और परिवार से मिलता है। समाज में बालिकाओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे शिक्षा की कमी, भेदभाव और स्वास्थ्य सेवाओं की अनदेखी। इस दिन हम यह सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होते हैं कि हर बालिका को समान अवसर मिले, उसका सम्मान हो और वह अपने सपनों को पूरा कर सके। 
बालिकाओं का सशक्तिकरण, एक बेहतर और प्रगतिशील समाज की नींव है। "जब हम एक लड़की को शिक्षित करते हैं, तो हम एक राष्ट्र को शिक्षित करते हैं।" "हर लड़की में दुनिया को बदलने की क्षमता होती है, उसके सपनों का समर्थन करें और उसे आगे बढ़ते हुए देखे।"  "सशक्त लड़कियां सशक्त भविष्य का निर्माण करती हैं।" हमारे समाज का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम आज अपनी बच्चियों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं और उन्हें महत्व देते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, कानूनी सुरक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण के माध्यम से बालिकाओं को सशक्त बनाना न केवल एक नैतिक दायित्व है बल्कि सामाजिक विकास के लिए एक राजनीतिक आवश्यकता भी है। यह सुनिश्चित करके लड़कियों को बढ़ने, सीखने और आगे बढ़ने के समान अवसर मिले, हम एक अधिक संतुलित, और न्याय संगत और समृद्ध समाज बना सकते हैं।  
इस अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर बालिकाओं पर गर्व करें। वे ही हैं जो साहस, दृढ़ संकल्प, बलिदान, प्रतिबद्धता, प्रतिभा और प्रेम से बनी हैं। बेटी है घर की शान, बेटी है घर का गहना, बेटी है परिवार की शक्ति, बेटी है देश का भविष्य। महक, मोहब्बत और बेटियां, कब वहां रूकती जहां वो पलती हैं, घर में संगीत बजता है हर पल, जब बेटियां पाज़ेब पहनकर चलती हैं, रौनक घर में बेटियों से ही होती है, अपनी मौजूदगी से वो घरों को रोशन करती हैं।

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