धूमधाम से मनाया गुरु गोविंद सिंह का प्रकाशोत्सव पर्व....!!
●गुरुद्वारे में कई धार्मिक कार्यक्रमों के साथ लंगर का हुआ आयोजन
●हर्षोल्लास के साथ गुरु गोविंद सिंह की जयंती मनाई गई:
बिहारशरीफ 25 जनवरी 2026 : बिहारशरीफ के भरावपर स्थित श्री गुरु नानक संगत पैजाबा गुरुद्वारा में सिक्खों के 10वें गुरु गुरुगोविंद सिंह की 359 वां प्रकाश उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारा में सुबह से ही विशेष शब्द कीर्तन, गुरुवाणी और प्रार्थना का पाठ किया गया। पटना से आये रागी जत्थों ने गुरु गोविंद सिंह महाराज के जीवन, उनके बलिदान और चारों बेटों की शहादत से जुड़े शब्दों का गायन किया। जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
गुरु गोबिंद सिंह कवि और दार्शनिक थे :
मौके पर बिहार सिख फेडरेशन पटना साहिब के संस्थापक सरदार भाई त्रिलोक सिंह निषाद जी ने शौर्य और साहस के प्रतीक गुरु गोबिंद सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरु गोबिंद सिंह का जन्म पौष माह की शुक्ल पक्ष सप्तमी की 22 दिसम्बर 1666 को बिहार के पटना में हुआ था। गुरु गोबिंद सिंह एक आध्यात्मिक गुरु होने के साथ-साथ एक योद्धा, कवि और दार्शनिक भी थे। गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। गुरु गोबिंद सिंह के जन्म दिवस को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। इन्होंने ही गुरु ग्रंथ साहिब को गुरुगद्दी देकर 11वें गुरु के रुप में स्थापित किया।
इंसान से प्रेम करना ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है :
मुख्य कथा वाचक ज्ञानी दलजीत सिंह ने गुरु गोविद सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा इंसान से प्रेम करना ही ईश्वर की सच्ची आस्था और भक्ति का संदेश दिया। उनका मानना था कि ईश्वर ने हमें जन्म दिया है ताकि हम संसार में अच्छे काम करें और बुराई को दूर करें।
गुरु गोविंद सिंह महान योद्धा और धार्मिक व्यक्ति थे :
बिहार सिख फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष सरदार दिलीप सिंह पटेल ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह का जन्म पटना में हुआ था। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की थी, जिसे सिख धर्म में प्रमुख माना जाता है। गुरु गोविंद सिंह जी महाराज एक महान योद्धा और धार्मिक व्यक्ति थे।
गुरु गोबिंद सिंह जी ने एक नई कौम को जन्म दिया
मीडिया प्रभारी राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने जीवन जीने के पांच सिद्धांत दिए हैं, जिन्हें पंज ककार कहा जाता है। ये पांच चीजें केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कच्छा है। 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोबिंद सिंह जी ने करके एक नई कौम को जन्म दिया था। सिख धर्म में पुरुष नाम के पीछे सिंह और महिला कौर रखने के आदेश गुरु ने ही दिए थे।
देश और धर्म के लिए किया था बलिदान :
सरदार भाई वीर सिंह ने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने देश और धर्म की रक्षा के लिए न सिर्फ खुद को बल्कि अपने पूरे परिवार को बलिदान कर दिया। देश और धर्म की रक्षा में उनके दो पुत्रों को जिंदा ही दीवार में चुनवा दिया। जिसके बाद भी उन्होंने अपने कर्तव्य तथा देश और समाज की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
गुरु गोबिंद सिंह रणनीतिकार और अप्रतिम योद्धा थे :
समाजसेवी धीरज कुमार ने कहा- गुरु गोबिंद सिंह जी भारत के ही नहीं बल्कि विश्व के एक महानतम व्यक्तित्व हैं। वे एक महान दार्शनिक, लेखक, कवि होने के साथ-साथ बेजोड़ रणनीतिकार और अप्रतिम योद्धा थे।
गुरु गोबिंद सिंह ने कमज़ोरों को वीर और बहादुरों को सिंह बना दिया :
ग्रंथी सतनाम सिंह उर्फ अनिल सिंह ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने आततायी के बुराई के खिलाफ आवाज उठाया और ‘सत श्री अकाल’ का नारा लगाया था। गुरु जी ने कमज़ोरों को वीर और बहादुरों को सिंह बना दिया था। जब कोई भी व्यक्ति गुरु गोबिंद सिंह जी का नाम सुनता है तो उसके मन में सिर्फ एक ही नाम आता है, शौर्य और साहस के प्रतीक गुरु गोबिंद सिंह जी का।
कार्यक्रम के दौरान पटना से आए प्रसिद्ध ज्ञानी रागी भाई अरविंद सिंह निर्गुण हजूरी जथ्था तख्त पटना साहिब तथा उनके साथियों द्वारा गुरु की महिमा, गुरुवाणी, कीर्तन प्रस्तुत किया। प्रस्तुति को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु निहाल हुये। सुबह के कार्यक्रम के बाद लंगर का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने एक साथ लंगर खाया।
कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री गुरुविंदर सिंह मल्होत्रा अपने परिवार के साथ एवं अन्य न्यायाधीश श्री राजेश गौरब, न्यायाधीश योगेन्द्र कुमार शुक्ला, न्यायाधीश श्री अभय सिंह, सरदार अनिल सिंह, सरदार दीप सिंह, रघुवंश सिंह, धर्मवीर सिंह, अरुण बिहारी शरण, सुमित बिहारी, अमर सिंह, श्रीकांत, युवराज सिंह, सुनीता कौर, सुरेन्द्र प्रसाद, कुंदन कुमार, सरदार, भवदेव प्रसाद, अनिल सिंह, सरदार दीप सिंह, रघुवंश सिंह, धर्मवीर सिंह,विजय पासवान, दिनेश चौधरी, भाई रवि सिंह ग्रंथी रोहित कुमार, दीपक कुमार,राजदेव पासवान ने मत्था टेका।
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