बिहार दिवस – 2026 के उपलक्ष्य में बच्चों का परिभ्रमण एवं भव्य कविसम्मेलन....!!
पे बिहार दिवस के पावन अवसर पर चाँदी–वृन्दावन पहाड़ की रमणीय व ऐतिहासिक धरती पर एक भव्य, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक कविसम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर साहित्य, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम में साहित्य प्रेमी, कवि, शायर, इतिहासकार एवं ग्रामीण जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस स्थल के ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व का अवलोकन किया।
प्राकृतिक और ऐतिहासिक विशेषता
पलाश के खिले फूलों से सजा यह पहाड़ अपने अनुपम सौंदर्य और शांत वातावरण के कारण सभी का मन मोह लेने वाला रहा। यहाँ स्थित मंदिर को ग्रामीण शबरी माता का मंदिर मानते हैं, जबकि इतिहासकार डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह ने इसमें बौद्ध चिन्हों की उपस्थिति की ओर संकेत करते हुए इसे अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थल संभवतः ब्रज्याणी सम्प्रदाय के सिद्धाचार्यों का संघाराम रहा होगा, तथा प्राचीन दीवारों से संकेत मिलता है कि यहाँ कोई ऐतिहासिक संरचना अब भी दबी हो सकती है चुकी यहाँ पत्थरों को पटकने से एक अलग तरह की आवाज़ आती है जिससे पता चलता है की इस महत्वपूर्ण स्थल के नीचे कोई बिशेष संरचना दबी हुई है....
शैक्षणिक भ्रमण:
मध्य विद्यालय चाँदी एवं मध्य विद्यालय वृन्दावन के बच्चों ने भी इस स्थल का भ्रमण किया और उन्हें इसके ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन हेडमास्टर संजीव कुमार, संयोजक पिंटू कुमार चंद्रवंशी एवं उपस्थित कवियों द्वारा संयुक्त रूप से रिबन काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया।
काव्यपाठ की प्रस्तुति :
शकील अहमद अंसारी ने जोशीले स्वर में पढ़ा—
“पीर अली लटके फांसी पर,
तिलका मांझी थे हांसी पर,
मानी लेकिन नहीं हार...
जय बिहार, जय जय बिहार...”
युवा कवि अभिमन्यु प्रजापति ने शहीदों को समर्पित किया
“जिसे तिरंगा कफ़न मिला वह, पूजित तुलसी दल से,
उनके धूले चरण जा रहे, पावन गंगा जल से...”
ई. मिथिलेश प्रसाद चौहान ने बेटी विषय पर मार्मिक रचना प्रस्तुत की
“गर्भ में ही हत्या करा रहे,
आँखें भी न खुली हैं पापा,
क्या मैं माँ का बोझ बनी,
या आपको ठेस पहुँची पापा...”
सरदार वीर सिंह ने मगही में व्यंग्य प्रस्तुत किया—
“हाय रे आम के चटनी,
स्वाद लेबा कखनी...”
शायर नवनीत कृष्ण ने बच्चों को प्रेरित किया—
“खेलो खेल पढ़ाई का,
करो न काम लड़ाई का,
सारा जग गुणगान करेगा,
शोहरत तेरी बढ़ाई का...”
कवि रामानुज सिंह ने शेखपुरा जिले पर आधारित भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया, जिससे श्रोता भाव-विभोर हो उठे।
संचालन एवं अध्यक्षता
कार्यक्रम का सफल संचालन शायर नवनीत कृष्ण ने किया, जबकि अध्यक्षता डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह ने की।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन समाजसेवी एवं संयोजक पिंटू चंद्रवंशी ने किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में यह स्थल एक प्रमुख सांस्कृतिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा।
उपस्थित गणमान्य लोग :
श्री प्रयाग चौहान, श्री सीताराम चौहान, श्री परशुराम चौहान, श्रीमती रीना कुमारी चंद्रवंशी, शिक्षक श्रवण चौहान, किशोरी साहेब , रणजीत कुमार,संतोष कुमार सहित अनेक सम्मानित व्यक्ति उपस्थित रहे।
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