महान स्वतंत्रता सेनानी जुब्बा सहनी का मना 82वां शहादत दिवस.....!!
●अगस्त क्रांति के महानायक अमर शहीद जुब्बा सहनी का 82 वाँ शहादत दिवस मनाया गया
● बलिदान दिवस पर याद किए गए शहीद जुब्बा सहनी
राजगीर,15 मार्च 2026 : राजगीर के निषाद आश्रम में रविवार को अगस्त क्रांति के महानायक अमर शहीद जुब्बा सहनी की 82 वाँ शहादत दिवस मनाया गया।
समारोह की अध्यक्षता केवट जागृति मंच के संस्थापक भाई त्रिलोक सिंह निषाद जी ने की। जबकि संचालन केवट जागृति मंच के सचिव गौतम कुमार केवट ने किया।
समारोह में उपस्थित केवट-निषाद परिवार और जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, जुब्बा सहनी के अनुयायी एवं अनेकों गणमान्य लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा उनके बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए याद किया।
मौके पर अध्यक्षता करते करते हुए केवट जागृति मंच के संस्थापक भाई त्रिलोक सिंह निषाद ने कहा कि महापुरुषों के इतिहास एवं बलिदान को याद कर उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है। उन्होंने जुब्बा सहनी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में जुब्बा सहनी ने 16 अगस्त 1942 मीनापुर थाना के अंग्रेज दरोगा लुईस वालर को थाना के अंदर मिट्टी तेल छिड़कर जला दिया और आजादी का मार्ग प्रशस्त किया। इसी आरोप में उन्हे 11 मार्च 1944 को भागलपुर सेंट्रल जेल में फांसी दी गई थी। उन्होंने अपने 52 साथियों के आरोप को अपने ऊपर लेते हुए फांसी पर चढ़े थे। उन्होंने कहा- वर्तमान में राजगीर के यह निषाद आश्रम की स्थिति जर्जर हो गया है। इसका नवनिर्माण प्रारंभ किया जा रहा है,और इसके नवनिर्माण के लिए निषाद समाज से सहयोग की अपील की है।
मौके पर शंखनाद के महासचिव समाजसेवी राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि जुब्बा सहनी का जीवन देशभक्ति, साहस और त्याग की अमर गाथा है। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति देकर देशवासियों को स्वतंत्रता की राह दिखाई। आज भी उनका बलिदान नई पीढ़ी को राष्ट्रसेवा और सामाजिक न्याय के लिए प्रेरित करता है।
मंच संचालन करते हुए केवट जागृति मंच से सचिव गौतम कुमार केवट ने कहा कि जुब्बा सहनी ने सपना देखा था कि आजादी के बाद हमारे समाज को आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक संसाधनों पर हिस्सेदारी, शासन प्रशासन में हिस्सेदारी मिलेगी लेकिन आज भी उनका सपना अधूरा है।
समाजसेवी परमेश्वर केवट ने कहा कि जुब्बा सहनी ने अपने समाज को व देश को आगे बढ़ाने के लिए अपनी शहादत दी। उनका सपना तभी पूरा हो सकता है जब देश में सभी वंचित एवं कमजोर वर्गों को बराबरी का अधिकार मिल जाएगा। उन्होंने युवाओं से शहीदों को याद करने के लिए जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की।
कार्यक्रम में अनिल केवट ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अमर शहीद जुब्बा सहनी ने सभी क्रांतिकारी आरोपों को अपने ऊपर लेकर उन्होंने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमकर मातृभूमि के प्रति अपना कर्तव्य निभाया।
अधिवक्ता चन्द्र भूषण ने अपने संबोधन में जुब्बा सहनी को राष्ट्रीय आंदोलनों का सच्चा प्रेरणास्रोत बताया और युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाने की अपील की।
इस अवसर पर धर्मवीर सिंह, सुमित बिहारी, गौशनगर के शैलेश निषाद, रमेश केवट, जगन केवट, नन्दलाल केवट, उदय केवट, अरविंद केवट, राम इत्तर केवट, कलकत्ता हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजू कुमार, नवादा के राजेन्द्र प्रसाद, रोहित कुमार प्रदीप कुमार महतो, फ़िल्म अभिनेता संजय निषाद सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने शहीद की स्मृति को जीवित रखने तथा उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
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