बिहार दिवस पर चाँदी–वृन्दावन पहाड़ पर कवि सम्मेलन में जमकर लगे ठहाके....!

बिहार दिवस पर साहित्य, संगीत और अभिव्यक्ति की एक यादगार शाम

शेखपुरा, 24 मार्च :  23 मार्च दिन सोमवार को देर शाम चाँदी–वृन्दावन पहाड़ पर बिहार दिवस के पावन अवसर पर पहाड़ की ऐतिहासिक शिखर पर एक भव्य, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन की अध्यक्षता शंखनाद के अध्यक्ष इतिहासज्ञ डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह ने किया। जबकि मंच का सफल संचालन राष्ट्रीय शायर नवनीत कृष्ण ने किया। यह सम्मेलन दो सत्रों में संमपन हुआ।  
इस कवि सम्मेलन में साहित्यप्रेमी, कवि, शायर, इतिहासकार, बड़ी संख्या में आस-पास के ग्रामीण एवं कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। सभी ने मिलकर इस स्थल के ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व का गंभीरता से अवलोकन किया।
प्रथम सत्र में शेखपुरा के प्राकृतिक और ऐतिहासिक विशेषताओं पर चर्चा हुई।
चाँदी–वृन्दावन पहाड़ पर पलाश के खिले हुए फूलों से सजा पहाड़ अपने अनुपम सौंदर्य और शांत वातावरण के कारण सभी का मन मोह रहा था। यहाँ स्थित मंदिर को आस-पास के ग्रामीण शबरी माता का मंदिर मानते हैं, जबकि इतिहासज्ञ डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह ने इसे बौद्ध चिन्हों की उपस्थिति की ओर संकेत करते हुए इसे अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल बताया। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थल संभवतः वज्रयानी सम्प्रदाय के सिद्धाचार्यों का संघाराम रहा होगा, तथा प्राचीन दीवारों से संकेत मिलता है कि यहाँ कोई ऐतिहासिक संरचना अब भी दबी हो सकती है चुकी यहाँ पत्थरों को पटकने से एक अलग तरह की आवाज़ आती है जिससे पता चलता है की इस महत्वपूर्ण स्थल के नीचे कोई बिशेष संरचना दबी हुई है। बिहार के शेखपुरा जिले में, विशेषकर गिरिहिंडा पहाड़ पर प्राचीन बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण अवशेष मिलते हैं। यहाँ 10वीं शताब्दी की बुद्ध की मूर्ति, स्तूप के अवशेष और शिलालेख मिले हैं, जो इस क्षेत्र को 1500 वर्षों से अधिक का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक बौद्ध तीर्थस्थल साबित करते हैं। यह पूरा क्षेत्र मगध की पहाड़ियों का हिस्सा होने के कारण प्राचीन काल से ही बौद्ध सांस्कृतिक धरोहरों का केंद्र रहा है। इस पहाड़ के आसपास बौद्ध स्तूप के अवशेष और पुरातात्विक अवशेष पाए गए हैं। इस क्षेत्र को पर्यटक स्थल घोषित किया जाना चाहिए। 
 
द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन :

कवि सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानाध्यापक संजीव कुमार, संयोजक पिंटू कुमार चंद्रवंशी एवं उपस्थित कवियों द्वारा संयुक्त रूप से फिता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर तथा उपस्थित कवियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। 
आयोजित समारोह के द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन में राज्य एवं शेखपुरा जिले के कोने-कोने से उपस्थित कवियों ने देर शाम तक श्रोताओं को हंसी के ठहाकों के बीच सराबोर कर दिया।
कवि सम्मेलन में मध्य विद्यालय चाँदी एवं मध्य विद्यालय वृन्दावन के बच्चों ने इस स्थल का शैक्षणिक भ्रमण किया और उन्हें इसके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से अवगत कराया गया।
 कवि सम्मेलन में काव्यपाठ की प्रस्तुति :
कवि सम्मेलन में प्रोफ़ेसर शकील अहमद अंसारी ने अपनी कविता  “पीर अली लटके फांसी पर,तिलका मांझी थे हांसी पर, मानी लेकिन नहीं हार...जय बिहार, जय जय बिहार..।”
युवा कवि अभिमन्यु प्रजापति ने शहीदों को कविता समर्पित किया- “जिसे तिरंगा कफ़न मिला वह, पूजित तुलसी दल से, उनके धूले चरण जा रहे, पावन गंगा जल से...।”
कवि ई. मिथिलेश प्रसाद चौहान ने बेटी विषय पर मार्मिक रचना प्रस्तुत की- “गर्भ में ही हत्या करा रहे, आँखें भी न खुली हैं पापा...। , 
सरदार वीर सिंह ने मगही में व्यंग्य प्रस्तुत किया- “हाय रे आम के चटनी, स्वाद लेबा कखनी...।”
मंच संचालन करते हुए शायर नवनीत कृष्ण ने कविता माध्यम से बच्चों को प्रेरित किया- “खेलो खेल पढ़ाई का, करो न काम लड़ाई का, सारा जग गुणगान करेगा, शोहरत तेरी बढ़ाई का...।” 
कवि रामानुज सिंह ने शेखपुरा जिले पर आधारित भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया, जिससे श्रोता भाव-विभोर हो उठे।
कार्यक्रम में साहित्य प्रेमी, कवि, शायर, इतिहासकार एवं ग्रामीण जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस स्थल के ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व का अवलोकन किया।
उपस्थित गणमान्य लोग : श्री प्रयाग चौहान, श्री सीताराम चौहान, श्री परशुराम चौहान, श्रीमती रीना कुमारी चंद्रवंशी, शिक्षक श्रवण चौहान, किशोरी साहेब, रणजीत कुमार,संतोष कुमार सहित सैकड़ों गणमान्य सम्मानित व्यक्ति उपस्थित थे।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन समाजसेवी एवं संयोजक पिंटू चंद्रवंशी ने किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में यह स्थल एक प्रमुख सांस्कृतिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

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