विपश्यना केंद्र नालंदा में विपश्यना ध्यान का प्रशिक्षण: लोगों ने सीखी सांस पर ध्यान केंद्रित करने की कला....!
● जीने की कला सिखाती है विपश्यना ध्यान
नालंदा,14अप्रैल 2026 : विपश्यना केंद्र नालंदा में दस दिवसीय विपश्यना ध्यान शिविर का आयोजन किया गया। जिसका समापन 14 अप्रैल को किया गया।
इस शिविर में शिक्षक के रूप में आचार्य सज्जन कुमार गोयनका जी उपस्थित थे। इनके सानिध्य में अनेको साधक और साधिकाओं ने ध्यान शिविर में भाग लिया।
जिसमें सेवक के रूप में संदीप कुमार, सचिन यादव, सेविका के रूप में मीरा जयसवाल, साधिका प्रीति जयसवाल, बंदना कुमारी, रूपा भारती, रजनी शर्मा, विमल देवी, राधा देवी, अनीता कुमारी ने प्रमुखता से भाग लिया।
मौके पर शिविर में आचार्य सज्जन कुमार गोयनका ने बताया कि दुनियाभर में ध्यान के कई तरीके प्रचलित हैं और उनमें से एक है विपश्यना ध्यान। वैसे तो लगभग हर ध्यान का लक्ष्य एक ही होता है लेकिन ध्यान की तकनीक और फिलोस्फी उसे अलग बनाती है। विपश्यना ध्यान की अनोखी तकनीक और इसके सिद्धांत ने इसे आज के दौर में प्रचलित किया है। यह ध्यान की एक बहुत ही प्राचीन विधि है जिसे आज से 2550 वर्ष पूर्व गौतम बुद्ध ने पुन: ढूंढ निकाला था। भगवान बुद्ध ने इसी ध्यान की तकनीक के द्वारा बुद्धत्व प्राप्त किया था।
विपश्यना ध्यान का उद्देश्य :
उन्होंने कहा- विपश्यना शब्द का अर्थ है- अंदर से देखना यानि आत्मनिरीक्षण। विपशयना ध्यान कहता है कि जो चीजें जैसी है, उसे वैसे ही देखो। विपश्यना सत्य और वर्तमान पर फोकस करता है। अगर आपको सच के साथ और वर्तमान में जीने की कला सीखनी है, तो आपको विपश्यना ध्यान का अभ्यास करना चाहिए। इस ध्यान की खास बात है कि यह ध्यान आपको भूत की चिंताओं और भविष्य की आशंकाओं में जीने के बजाय आज के बारे में सोचने के लिए कहता है। यह ध्यान आपको जीवन की सच्चाई से भागने की शिक्षा नहीं देता है, बल्कि उस उसके वास्तविक स्वरूप में स्वीकारने कहता है।
स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद :
उन्होंने विपश्यना ध्यान को स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद बताया। इससे एकाग्रता बढ़ती है। सांस के पैटर्न और गति को समझने में मदद मिलती है। नियमित अभ्यास से श्वास प्रक्रिया में सुधार होता है। यह तकनीक शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। इससे पाचन क्रिया बेहतर होती है। भूख नियंत्रित होती है। मन और शरीर के बीच संबंध मजबूत होता है। इससे आत्म-जागरूकता में वृद्धि होती है।
शिविर में अजीत कुमार मेहता, मोहम्मद अहमद, मुकेश कुमार, अभिषेक कुमार, राकेश बिहारी शर्मा सहित कई अन्य लोग भी उपस्थित रहे।
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