बबुरबन्ना में राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती मनाई गई ....।
बिहारशरीफ, 26 जून 2026 : बिहारशरीफ के बबुरबन्ना मोहल्ला स्थित बिहारी सभागार में आरक्षण के जनक, दलितों पिछड़ों के मसीहा, सामाजिक न्याय के राजर्षी छत्रपति शाहू महाराज की 152वीं जयंती समारोह मनाई गई। जिसकी अध्यक्षता शंखनाद के कोषाध्यक्ष भाई सरदार वीर सिंह ने जबकि मंच संचालन शंखनाद के मीडिया प्रभारी शायर नवनीत कृष्ण ने किया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ महासचिव राकेश बिहारी शर्मा, भाजपा नेता संदीप कुमार, भाई सरदार वीर सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन एवं छत्रपति शाहूजी महाराज के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया।
मौके पर इस दौरान शंखनाद के महासचिव साहित्यकार राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि सामाजिक लोकतंत्र के आधारस्तंभ, लोककल्याणकारी शासन और आरक्षण के अग्रदूत राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज ने देश को एक ऐसी दिशा दी जिससे गांव का समाज सजग हुआ। उन्होंने कहा- शाहूजी महाराज का जन्म 26 जून 1874 को कोल्हापुर में हुआ था। वह कोल्हापुर रियासत के राजा थे। उन्हें आरक्षण का जनक भी कहा जाता है। उनके प्रशासन में ज्यादातर ब्राह्मण जाति के लोग ही थे। इस एकाधिकार को समाप्त करने के लिए उन्होंने आरक्षण का कानून बनाया और अपनी रियासत में बहुजन समाज के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की।देश में आरक्षण की यह पहली व्यवस्था मानी जाती है। शाहूजी महाराज महात्मा जोतिबा राव फुले से जीवन भर प्रभावित रहें और डॉ. अम्बेडकर के मददगार थे। उन्होंने 1912 में प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य और मुफ्त करने का कानून बनाकर पिछड़े-अतिपिछडे एवं दलितों के लिए शिक्षा का दरवाजा खोला।
मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भाई सरदार वीर सिंह ने छत्रपति शाहूजी महाराज के जीवन परिचय के साथ उनके द्वारा समाज में किए गए कार्यों के बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन किया।
मौके पर भाजपा के उत्तरी मंडल अध्यक्ष श्री संदीप कुमार ने कहा कि छत्रपति शाहू जी महाराज ने देश को सांस्कृतिक व सामाजिक रूप से स्थिर व एकीकृत करने के सफल प्रयास किए थे। उन्होंने अस्पृश्यता के खिलाफ मुखर होकर जनजागरूकता फैलाई। सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक क्षेत्रों में उनके द्वारा लिए गए क्रांतिकारी निर्णय युगों-युगों तक प्रेरित करते रहेंगे।
मौके पर शिक्षाविद राजहंस कुमार ने कहा कि छत्रपति शाहू ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने राजा होने के बावजूद दलित और शोषित वर्ग के कष्ट को समझा और उनसे हमेशा निकटता बनाए रखी। शाहू जी महाराज ने दलित वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने गरीब छात्रों के लिए छत्रावास स्थापित किए और बाहरी छात्रों को शरण प्रदान करने के आदेश दिए।
मंच संचालन करते हुए शंखनाद के मीडिया प्रभारी नवनीत कृष्ण ने कहा कि छत्रपति शाहूजी आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा थे। उन्हें एक सच्चा लोकतंत्रवादी और समाज सुधारक माना जाता था। अपने शासन के दौरान कई प्रगतिशील नीतियों से जुड़े थे। उन्होंने अपने राज्य में पिछड़ी जाति के लोगों के हित के लिए काम किया। जाति और पंथ की परवाह किए बिना सभी को प्राथमिक शिक्षा उनकी सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में से एक थी।
इनकी रही उपस्थित-
इस अवसर पर समाजसेविका सविता बिहारी, समाजसेवी धीरज कुमार, भाजपा ओबीसी के मंडल अध्यक्ष सुरेन्द्र प्रसाद शर्मा, भाजपा अनुसूचित जाति के उत्तरी मंडल अध्यक्ष समाजसेवी कमल प्रभाकर, अर्जुन राम, सोना बिहारी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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