कबीर ने दिया समरसता, प्रेम और मानवता का अमर संदेश : राकेश बिहारी....

कबीर सच्चे अर्थों में मध्यकालीन भारत के स्वाधीन चित्त महापुरुष थे : संदीप कुमार

●सद्गुरु कबीर का संदेश आज भी समाज के लिए प्रासंगिक :  प्रो.शकील अहमद

मानव कल्याण और सामाजिक समरसता के अग्रदूत थे कबीर :  सूर्य कुमार सरल
 
सोहसराय बबुरबन्ना, 29 जून 2026 : 29 जून दिन सोमवार को बिहारशरीफ के साहित्यिक भूमि बबुरबन्ना मोहल्ले में शंखनाद साहित्यिक मंडली के तत्वावधान में बिहारी निवास स्थित सभागार में कविवर सद्गुरु कबीर दास की जयंती के मौके पर “संत कबीर का सामाजिक सुधार में योगदान” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।
जिसकी अध्यक्षता शंखनाद के वरीय सदस्य प्रोफेसर डॉ. शकील अहमद अंसारी ने जबकि संचालन शंखनाद के महासचिव राकेश बिहारी शर्मा ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत कबीरदास के चित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धासुमन अर्पित कर की गई। तत्पश्चात दीप प्रज्वलित व कबीर के भजन के साथ हुई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। 
इस मौके पर शंखनाद साहित्यिक मंडली के महासचिव शिक्षाविद राकेश बिहारी शर्मा ने कार्यक्रम का विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि कबीरदास जी सच्चे अर्थों में मध्यकालीन भारत के स्वाधीन चित्त महापुरुष थे। उन्होंने रूढ़ियों, अंधविश्वास और सामाजिक भेदभाव का निर्भीक होकर विरोध किया तथा सत्य, मानवता, समानता और प्रेम का संदेश दिया। उनके विचार आज भी समाज को जागरूक और प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा- देश के इतिहास में ऐसे अनेकों महापुरूष हुए हैं, जिन्होंने आध्यात्मिक जीवन दर्शन के रहस्यों को सीधे और सरल शब्दों में समझाने का प्रयास किया है। सूरदास,ल तुलसीदास, कालीदास सहित अनेक महान कवियों ने अपनी-अपनी भाषाशैली में समाज को नया रास्ता दिखाया है। इन कवियों की श्रखंला में महान कवि संत कबीरदास को भी कभी भूलाया नही जा सकता। आज उनकी जयंती समारोह में मैं उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं। संत कबीरदास जी भक्तिकाल के प्रमुख कवि थे। कबीरदास जी न सिर्फ एक संत थे बल्कि वे एक महान विचारक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन में समाज की बुराईयों को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास किया और कई दोहे और कविताओं की रचना करके समाज को नई दिशा दिखाई। कबीरदास जी हिन्दी साहित्य के ऐसे कवि थे जिन्होंने समाज में फैले आडंबरों को अपनी लेखनी के बलबूते पर उस पर कुठाराघात किया था। उन्होंने समाज को अपने दोहों के माध्यम से जीवन जीने की कई सीख भी दी हैं।
समारोह में शंखनाद के कोषाध्यक्ष भाई सरदार वीर सिंह ने कहा कि आज महान कवि एवं संत कबीर दास की जयंती है। कबीर भारतीय मनीषा के प्रथम विद्रोही संत हैं। उनका विद्रोह अंधविश्वास और अंधश्रद्धा के विरोध में सदैव मुखर रहा है।
मौके पर भाजपा के उत्तरी मंडल अध्यक्ष श्री संदीप कुमार ने कहा कि हमें संत कबीरदास के बताए गए मार्गों पर चलाना चाहिए। कबीर दास ने सर्व समाज को अध्यात्मिक विचारों से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। महापुरुष आज भी उनके दिखाए मार्ग पर चलने का आह्वान करते हैं, ताकि समाज में भाईचारा एवं सम्मानता बनी रहे।
मौके पर शिक्षाविद राजहंस कुमार ने कहा कि कविवर सद्गुरु कबीर दास जी ने सर्व समाज के लिए मानव कल्याण, प्रेम, समानता और सद्भाव का संदेश देकर सामाजिक एकता की मजबूत नींव रखी। उनके विचार आज भी संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा- कबीर, आज के लिए प्रसांगिक हैं। आज विश्व में जिस तरह दुनिया को पाखंड और अंधविश्वास में जकड़ा जा रहा है। कुछ अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के द्वारा दुनिया को फिर से गुलाम बनाने की साजिश रची जा रही है।
मौके पर प्रोफेसर डॉ. सूर्य कुमार सरल ने कहा कि संत कबीर ने हमेशा इंसानियत को सर्वोपरि समझा। कबीर दास ने उस समय सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई जब समाज सैकड़ों कुरीतियों की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। उनका मानना था कि इंसान जाति, धर्म, वर्ण या वर्ग से नहीं बल्कि अपने गुणों से बनता है। महापुरुषों की जयंती मनाने का मूल उद्देश्य यह है कि आने वाली पीढ़ी अच्छे विचारों को अपने जीवन में धारण करें।
समारोह को संबोधित करते हुए समाजसेवी धीरज कुमार ने कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब का प्राकट्य ऐसे समय में हुआ था, जब समाज में भेदभाव, छुआछूत, आडंबर और अंधविश्वास चरम पर था। उन्होंने मानवता, समानता और भाईचारे का संदेश देकर समाज को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि कबीर साहेब ने हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों को मानव धर्म का उपदेश दिया तथा सभी मनुष्यों को समान बताया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर डॉ. शकील अहमद अंसारी ने कहा कि सभी धर्म, जाति व समुदायों की धारा भले ही अलग-अलग हो, लेकिन सभी का रास्ता मानवता की ओर जाता है। अपने देश में जितने भी ऋषि-मुनि व महापुरुष हुए हैं, उन सभी ने मानवता का पाठ पढ़ाया है। संत कबीर ने सभी धर्मों को एक सूत्र में बांधने का काम किया। अपने जीवनकाल में कई सामाजिक बुराइयों पर जमकर प्रहार किया।
इनकी रही उपस्थित-
इस अवसर पर समाजसेविका सविता बिहारी, धीरज कुमार, भाजपा ओबीसी के मंडल अध्यक्ष सुरेन्द्र  प्रसाद शर्मा, भाजपा अनुसूचित जाति के उत्तरी मंडल अध्यक्ष समाजसेवी कमल प्रभाकर, पूजा कुमारी, स्वाति कुमारी, सोना बिहारी, आनंद बिहारी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन शंखनाद के महासचिव साहित्यानुरागी साहित्यसेवी साहित्यकार राकेश बिहारी शर्मा ने किया।

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