भोजपुरी के महानायक भिखारी ठाकुर बिहार के सांस्कृतिक धरोहर: राकेश बिहारी....

भिखारी ठाकुर भोजपुरी साहित्य, कला और संस्कृति के सच्चे उन्नायक थे :
●पुण्यतिथि पर याद किये गए भोजपुरी के महानायक भिखारी ठाकुर
बिहारशरीफ,10 जुलाई 2026 : नालन्दा जिले के अखिल भारतीय नाई संघ ट्रेड यूनियन के सदस्यों व पदाधिकारियों ने शुक्रवार को नाई संघ कार्यालय स्थित सभागार में भोजपुरी के महानायक जनकवि भिखारी ठाकुर की 55 वीं पुण्यतिथि स्मृति दिवस के रूप में श्रद्धा पूर्वक मनाई गई। मौके पर उपस्थित सभी सदस्यों ने उनकी तस्वीर पर पुष्प माला अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। जिसकी अध्यक्षता संघ के जिलाध्यक्ष रंजीत कुमार शर्मा ने जबकि कार्यक्रम का संचालन निगरानी अध्यक्ष विक्रम कुमार ने जनकवि भिखारी ठाकुर के भावपूर्ण गीतों के साथ किया।
मौक पर नाई संघ के जिला संयोजक राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि आज मगही, भोजपुरी लोक संस्कृति के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर एवं भोजपुरी नाटकों लोकगीतों के बेताज बादशाह भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि है, जिन्होंने मगही और भोजपुरी समाज को उसकी अस्मिता, उसकी भाषा और उसकी आत्मा से परिचित कराया। भिखारी ठाकुर जी ने अपने संघर्षों, अनुभवों और संवेदनशील हृदय से वह रचनाएँ रचीं, जो आज भी हर हृदय को झकझोर देती हैं। वो सिर्फ एक कलाकार नहीं थे, वो एक आंदोलन थे। एक चेतना थे। उन्होंने अपने लोकगीतों, नाटकों और कविताओं के माध्यम से उन पीड़ाओं को स्वर दिया जिन्हें समाज अक्सर अनदेखा कर देता था। स्व. ठाकुर ने समाज में व्याप्त कुरीतियों पर अपनी रचनाओं में करारा प्रहार किया है। भोजपुरी संस्कृति को एक नई पहचान देने के साथ-साथ समाज में फैली कुरीतियों पर जमकर हल्ला बोला। बिदेशिया, गबर-घिचोर के साथ-साथ बेटी-बियोग और बेटी बेचवा जैसे नाटकों के जरिये उन्होंने समाज में अलग तरह की चेतना फैलाई। उन्होंने 29 पुस्तकें लिखी। उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर बिहार के सांस्कृतिक धरोहर हैं और हम सभी को उनकी विरासत को बचाकर रखना होगा।
मौके पर अध्यक्षता करते हुए संघ के जिलाध्यक्ष रंजीत कुमार शर्मा ने कहा कि बाबा भिखारी ठाकुर लोक कलाकार ही नहीं थे, बल्कि जीवन भर सामाजिक कुरीतियों और बुराइयों के खिलाफ कई स्तरों पर जूझते रहे। उनके अभिनय और निर्देशन में बनी भोजपुरी फिल्म ‘बिदेसिया’ आज भी लाखों-करोड़ों दर्शकों के बीच पहले जितनी ही लोकप्रिय है।
समारोह में माले नेता मकदूदन शर्मा ने कहा कि भिखारी ठाकुर एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक योद्धा थे। उन्होंने समाज मे परिवर्तन लाने के लिये रंगमंच का सहारा लिया। उनके नाटकों का असर समाज पर बहुत ही गहरे स्तर पर पड़ता था। अपनी कला को चर्मोत्कर्ष पर ले जाकर सामाजिक विडम्बनाओं को बड़े ही सहज और सरल तरीके से अभिव्यक्त करने का हुनर था। भिखारी ठाकुर एक कालजयी रचनाकार थे।
अधिवक्ता सुबोध कुमार ने कहा कि भिखारी ठाकुर कबीर की परम्परा के कलाकार थे। उनके अंदर कबीर जैसी आध्यात्मिक दृष्टि थी। स्वर्गीय ठाकुर जी आज पहले से ज्यादा प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा भिखारी ठाकुर जैसे कलाकार युगों में पैदा होते हैं।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में भिखारी ठाकुर के गीतों पर केंद्रित सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस दौरान संघ के महासचिव परमेन्द्र शर्मा, कोषाध्यक्ष राकेश कुमार, समाजसेवी धीरज कुमार, सविता बिहारी, संतोष कुमार शर्मा, अशोक शर्मा, अरविंद कुमार, अजय शर्मा, सुधीर कुमार शर्मा, वरीय अधिवक्ता सुरेन्द्र प्रसाद, अनीता देवी, नेहा कुमारी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रधानाध्यापक के सेवानिवृत्ति पर भव्य विदाई समारोह का आयोजन, शिक्षकों और छात्रों ने दी भावभीनी विदाई...!!

सुपुर्दे खाक हुए मो. तस्लीमुद्दीन, संघ के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष कुमार राकेश ने कहा- अलविदा भाई.....!!

शिक्षक नेता के निधन पर ककड़िया में श्रद्धांजलि सभा.....!"