बबुरबन्ना में समाजसेविका लक्ष्मी देवी को दी गई श्रद्धांजलि, ब्रह्म भोज का किया बहिष्कार....

वेद की ऋचाओं से गूंजा बबुरबन्ना
बिहारशरीफ, 18 अगस्त। सोहसराय क्षेत्र के बबुरबन्ना मोहल्ले में स्वर्गीय शिव नारायण प्रसाद की पत्नी एवं पिक्कु मुखिया की 86 वर्षीय माता लक्ष्मी देवी के निधन पर सोमवार देर शाम शांति-यज्ञ एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। आर्य समाज की वैदिक परंपरा के अनुरूप आयोजित कार्यक्रम में ब्रह्म भोज का बहिष्कार कर दिवंगत के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों एवं स्थानीय नागरिकों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि लक्ष्मी देवी का निधन परिवार और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। जीवन की सार्थकता अच्छे कार्यों और मानवीय मूल्यों में है। उन्होंने कहा कि शोक के समय अनावश्यक आडंबर के बजाय दिवंगत के श्रेष्ठ गुणों को याद करना और उनके आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
समाजसेवी एवं शिक्षाविद राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि लक्ष्मी देवी कर्मनिष्ठ, जागरूक एवं समाजसेवी महिला थीं। गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की सहायता के साथ-साथ उन्होंने अंधविश्वास और पाखंड का विरोध किया। महिलाओं और पुरुषों को सामाजिक रूप से जागरूक करने तथा महिलाओं की शिक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करना उनके जीवन का महत्वपूर्ण पक्ष रहा। उनका जीवन सादगी, सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा था।
जदयू के राष्ट्रीय महासचिव इंजीनियर सुनील कुमार ने कहा कि आर्य समाज की परंपरा सत्य, तर्क, वेद-विचार और मानव सेवा का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के अवसर पर आडंबर के बजाय वैदिक मंत्रोच्चार, आत्मचिंतन और दिवंगत के अच्छे गुणों को आगे बढ़ाना अधिक महत्वपूर्ण है।
शिक्षाशास्त्री प्रो. (डॉ.) सत्येन्द्र प्रसाद ने कहा कि जीवन और मृत्यु प्रकृति के शाश्वत सत्य हैं। श्रद्धांजलि केवल रस्म नहीं, बल्कि दिवंगत के श्रेष्ठ विचारों और संस्कारों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प है।
बिहार सरकार के पूर्व मंत्री बृजनंदन प्रसाद यादव ने कहा कि लक्ष्मी देवी में समाजसेवा की भावना कूट-कूटकर भरी थी। वह परिवार और समाज को जोड़कर रखने वाली महिला थीं। उनके निधन से वंचित एवं जरूरतमंद लोगों को भी अपूरणीय क्षति हुई है।
समाजसेवी सरदार भाई वीर सिंह ने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों को इस दुःख की घड़ी में शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
कार्यक्रम में आर्य समाजी पाणिनि कन्या महाविद्यालय, वाराणसी की भजनोपदेशक वेदांजलि आर्या एवं सुमेधा आर्या ने वैदिक भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों से श्रद्धांजलि सभा का वातावरण भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक हो गया।
इस अवसर पर पूर्व एमएलसी राजेश कुमार उर्फ राजू यादव, कॉंग्रेस नेता दिलीप कुमार, नालंदा जिला आर्य समाज के संरक्षक अशोक कुमार आर्य, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री हरिनारायण सिंह, जूनियर वारंट ऑफिसर अरविंद कुमार गुप्ता, पटेल एग्री इंडस्ट्रीज के प्रबंधक जेडी बाबू, पैक्स अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार मुन्ना, कल्लु मुखिया, रंजीत मुखिया, सुरेन्द्र कुमार शर्मा, सुरेश प्रसाद, कुंदन कुमार, राधा आर्या, वीना आर्या, लता आर्या, राजन मुखिया, विजय मुखिया, सुनील मुखिया, रामजन्म यादव, अधिवक्ता रामविलास प्रसाद सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग एवं आम नागरिक उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि मां परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। लक्ष्मी देवी के सेवा, संस्कार और सामाजिक जागरूकता के कार्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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