नालंदा के तीन साहित्यकारों को पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति सम्मान....
● राकेश बिहारी शर्मा, डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह एवं नवनीत कुमार साहित्य एवं शिक्षा में योगदान के लिए हुए सम्मानित
बिहारशरीफ। साहित्य, शिक्षा और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए नालंदा के साहित्यकार एवं शिक्षाविद राकेश बिहारी शर्मा, साहित्यकार डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह तथा साहित्यकार नवनीत कुमार को पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया। बिहार विधान परिषद के सभागार में रविवार देर शाम आयोजित सम्मान समारोह में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों एवं शिक्षाविदों को अंगवस्त्र, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिह्न प्रदान कर उनके योगदान का अभिनंदन किया गया।
समारोह में हवेली खड़गपुर के साहित्यकार एवं कवि प्रदीप पाल तथा डॉ. मीनाक्षी कुमारी समेत कई साहित्यकारों को भी सम्मानित किया गया।
समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. एमडी सैयद अता हसनैन, रवीन्द्र शर्मा एवं आयोजकों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. एमडी सैयद अता हसनैन ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण व्यक्तित्व थे। चंपारण के किसानों की समस्याओं, विशेषकर नील की खेती से जुड़ी तिनकठिया प्रथा के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई और इस मुद्दे को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को चंपारण लाने में पंडित राजकुमार शुक्ल की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके लगातार प्रयासों के बाद गांधीजी चंपारण पहुंचे और वर्ष 1917 का चंपारण सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण अध्याय बना। राज्यपाल ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल जैसे महान व्यक्तित्वों की प्रेरणादायी गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। बच्चों और युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन एवं राष्ट्र निर्माण से जुड़ी ऐसी कहानियों से परिचित कराने के साथ सोशल मीडिया और अन्य आधुनिक माध्यमों का भी उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने ‘लोकचिंतन’ पत्रिका में स्वतंत्रता आंदोलन के अनछुए पहलुओं तथा महान व्यक्तित्वों के योगदान पर अधिक सामग्री प्रकाशित करने का सुझाव दिया। राज्यपाल महोदय ने कहा कि साहित्य किसी भी समाज की चेतना, संवेदना और विचार-शक्ति का प्रतिबिंब होता है। साहित्यकार केवल शब्दों का सृजन नहीं करता, बल्कि समाज के अनुभवों, संघर्षों और आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति देता है। उन्होंने कहा कि साहित्य को नई पीढ़ी से जोड़ने तथा युवाओं में अध्ययन, चिंतन और रचनात्मक अभिव्यक्ति की प्रवृत्ति विकसित करने की आवश्यकता है।
साहित्यकार समाज की अंतरात्मा की आवाज : डॉ. प्रेम कुमार
बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार की धरती सदियों से ज्ञान, शिक्षा, दर्शन और साहित्य की उर्वर भूमि रही है। नालंदा की ऐतिहासिक विरासत ज्ञान और विचार की उस महान परंपरा की याद दिलाती है, जिसने पूरी दुनिया को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल ने अपने दृढ़ संकल्प और संघर्ष के बल पर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी स्मृति में साहित्यकारों और शिक्षाविदों को सम्मानित करना उनके आदर्शों और सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं साहित्यकार सुबोध कुमार सिंह ने कहा कि साहित्यकार समाज की अंतरात्मा की आवाज होता है। वह समाज में व्याप्त विसंगतियों को सामने लाने के साथ सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग भी दिखाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और साहित्य का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि व्यक्ति में मानवीय संवेदना, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने सम्मानित साहित्यकारों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके अब तक के साहित्यिक एवं शैक्षिक योगदान का अभिनंदन होने के साथ भविष्य में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा भी है।
समारोह के मुख्य वक्ता बिहार सरकार के उच्च शिक्षा एवं विधि विभाग के मंत्री संजय सिंह ‘टाइगर’ ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास का वास्तविक आधार उसकी शिक्षा और ज्ञान की गुणवत्ता होती है। उच्च शिक्षा को मजबूत करने के साथ साहित्य, शोध और रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को संवेदनशील बनाने का कार्य करता है। साहित्यकार अपने समय की समस्याओं को शब्द देता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए विचारों की विरासत छोड़ता है। पंडित राजकुमार शुक्ल की स्मृति में आयोजित यह समारोह नई पीढ़ी को इतिहास, संघर्ष और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। मंत्री ने कहा कि बिहार की पहचान केवल अपनी प्राचीन ज्ञान-परंपरा से नहीं, बल्कि वर्तमान समय में शिक्षा, साहित्य और बौद्धिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान से भी बननी चाहिए। शिक्षण संस्थानों में अध्ययन के साथ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना आवश्यक है।
सम्मान से बढ़ता है साहित्यकारों का मनोबल : राकेश बिहारी शर्मा
सम्मान प्राप्त साहित्यकार एवं शिक्षाविद राकेश बिहारी शर्मा ने पंडित राजकुमार शुक्ल की स्मृति में मिले सम्मान को गौरवपूर्ण बताते हुए आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान साहित्यकारों को अधिक जिम्मेदारी और ऊर्जा के साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपनी रचनात्मक भूमिका निभाने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यकार का दायित्व केवल रचना करना नहीं, बल्कि अपने समय की सच्चाइयों को समझना, समाज की पीड़ा और आकांक्षाओं को स्वर देना तथा सकारात्मक परिवर्तन के लिए जनचेतना पैदा करना भी है।
मजबूत संकल्प के व्यक्ति थे पंडित राजकुमार शुक्ल : डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह
साहित्यकार डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में साहित्य और साहित्यकारों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। सामाजिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं, शिक्षा और जागरूकता को मजबूत करने में साहित्य की प्रभावी भूमिका है। उन्होंने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति सम्मान-2026 जैसे आयोजन साहित्य के प्रति समाज में सम्मान बढ़ाने तथा नई पीढ़ी में रचनात्मक अभिरुचि विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
समारोह को पंडित राजकुमार शुक्ल स्मारक समिति के अध्यक्ष रवीन्द्र कुमार शर्मा एवं साहित्यसेवी धीरज कुमार ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर इंडियन रेड क्रॉस, बिहार शाखा के सदस्य अजीत कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समारोह का समापन साहित्य, शिक्षा और सामाजिक चेतना को मजबूत करने तथा पंडित राजकुमार शुक्ल के संघर्ष और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ।
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