साझी विरासत के बैनर तले राजाकुआँ में जुटे बुद्धिजीवी, 31 अक्टूबर के आयोजन की बनी रणनीति....

●श्रीकृष्ण सिंह मेमोरियल हॉल पटना में सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती समारोह में बड़ी भागीदारी का संकल्प
राजाकुआँ, 11 अक्टूबर 2026। ‘साझी विरासत’ के बैनर तले बिहारशरीफ के राजाकुआँ में समाजसेवी शिव कुमार कुशवाहा की अध्यक्षता में बैठक की गई। 
जबकि संचालन समाजसेवी संजय कुशवाहा ने किया।
इस आयोजित बैठक में सामाजिक एकता, राष्ट्रीय अखंडता और साझा सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। बैठक में आगामी 31 अक्टूबर को पटना के श्रीकृष्ण सिंह मेमोरियल हॉल में आयोजित सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती समारोह में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई गई।
सामाजिक विभाजन नहीं, संवाद और एकता का संदेश

बैठक को संबोधित करते हुए प्रोफेसर सच्चिदानंद प्रसाद वर्मा ने कहा कि ‘साझी विरासत’ भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का आधार है। समाज के विभिन्न वर्गों को सम्मान और बराबरी के साथ जोड़कर ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।
साहित्यकार शिक्षाविद राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि सरदार पटेल ने राजनीतिक एकीकरण के साथ मजबूत राष्ट्र की नींव रखने का कार्य किया। आज आवश्यकता है कि सामाजिक एकता भी उतनी ही मजबूत हो। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर साझा विरासत की रक्षा करनी होगी।
मौके पर अध्यक्षता करते हुए शिव कुमार कुशवाहा ने संगठन को सामाजिक शक्ति का आधार बताते हुए कहा कि बिखरे समाज की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़कर एक संगठित और जागरूक समाज का निर्माण किया जा सकता है।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अरुण कुमार मयंक ने कहा कि सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब हम उनके एकता और राष्ट्रनिर्माण के संदेश को सामाजिक जीवन में उतारें। उन्होंने साहित्य, संस्कृति और शिक्षा को समाज को जोड़ने का प्रभावी माध्यम बताया।
संचालन करते हुए  संजय कुशवाहा ने कहा कि समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता है। उन्होंने 31 अक्टूबर के कार्यक्रम को सामाजिक चेतना, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता के संदेश का प्रभावी मंच बनाने का आह्वान किया।

बैठक में अधिवक्ता कल्याण कुमार ने कहा कि सरदार पटेल केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और दृढ़ संकल्प के प्रतीक थे। आज उनके विचारों को समारोहों तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक जीवन में उतारने की जरूरत है। उन्होंने कहा- भारत की वास्तविक ताकत उसकी विविधता में एकता और साझा विरासत में निहित है।
31 अक्टूबर को पटना में जुटने का आह्वान :
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 31 अक्टूबर के कार्यक्रम में राजाकुआँ सहित आसपास के क्षेत्रों से अधिक से अधिक लोग भाग लेंगे। बैठक में आयोजन को सफल बनाने के लिए आपसी समन्वय, जनसंपर्क और लोगों को कार्यक्रम से जोड़ने पर जोर दिया गया।

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा—
“नफरत नहीं, संवाद चाहिए; विभाजन नहीं, एकता चाहिए और संकीर्णता नहीं, साझी विरासत चाहिए।”

बैठक का समापन सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने तथा सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ।
इस दौरान अधिवक्ता पवन कुमार, अर्जुन कुशवाहा, संजीव कुमार, धीरज कुमार, अवधेश पंडित, सत्येन्द्र पासवान, महेंद्र प्रसाद, संजय मेहता, सन्नी कुशवाहा, वीरेंद्र कुशवाहा, सुबोध पंडित, साचोजी, जीतू कुशवाहा, गोलू राउत, कृष्णा प्रसाद सहित दर्जनों लोगों ने प्रमुखता से अपनी बातों को रखा। इस बैठक में कई गणमान्य लोगों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की।

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