मिसाईल मैन ए.पी.जे.अब्दुल कलाम की 94 वीं जयंती पर विशेष...!!

 भारत रत्न,पद्म विभूषण, पद्म भूषण,विशिष्ट शोधार्थी डॉक्टर ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, वैज्ञानिक और जानेमाने अभियंता के रूप में विख्यात थे। ये मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) संभाला व भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे। ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु - रामेश्वरम के धनुषकोडी गाँव में एक गरीब मुस्लिम परिवार में हुआ था। इनके माता आशियम्मा व पिता जैनुलाब्दीन न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। इनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते और मछली पकड़ने का काम करते थे। अब्दुल कलाम संयुक्त परिवार में रहते थे। ये परिवार में स्वयं पाँच भाई एवं पाँच बहन थे अब्दुल कलाम के जीवन पर इनके पिता का बहुत प्रभाव रहा और उनके दिए संस्कार अब्दुल कलाम के बहुत काम आए। पाँच वर्ष की अवस्था में रामेश्वरम के पंचायत प्राथमिक विद्यालय में उनका दीक्षा-संस्कार हुआ था।  ये अपनी प्रारंम्भिक शिक्षा जारी रखने के लिए लोगों के बीच अख़बार वितरित करने का कार्य भी किया था। डॉक्टर कलाम अपने व्यक्तिगत जीवन में पूरी तरह अनुशासन का पालन करने वालों में से थे। ऐसा कहा जाता है कि वे क़ुरान और भगवद गीता दोनों का अध्ययन करते थे। उन्होंने कई प्रेरणास्पद पुस्तकों की भी रचना की थी और वे तकनीक को भारत के जनसाधारण तक पहुँचाने की हमेशा वक़ालत करते रहे थी। बच्चों और युवाओं के बीच डाक्टर क़लाम अत्यधिक लोकप्रिय थे। वह भारतीय अन्तरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के कुलपति भी थे। डॉ कलाम देश के ऐसे तीसरे राष्ट्रपति थे जिन्हें राष्ट्रपति बनने से पहले ही भारत रत्न ने नवाजा जा चुका था। इससे पहले डॉ राधाकृष्णन और डॉ जाकिर हुसैन को राष्ट्रपति बनने से पहले ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जा चुका था। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम में इससे भी कहीं ज़्यादा खुबियां थी। उनकी जिंदगी निः स्वार्थ थी। विनम्र दिल वाले डॉ. कलाम में बच्चों के लिए कभी न खत्म होने वाला प्यार था। उनकी कुछ नया जानने के लिए कभी न खत्म होने वाली खोज उन्हें दूसरों से अलग करती थी। डॉ. कलाम ने एक बार अपनी स्पीच में कहा था कि अगर कोई सूरज की तरह चमकना चाहता है, तो उसे सूरज की तरह जलना भी होगा और वास्तव में, उनकी योग्यता पर पूरे देश को आज गर्व है और हम उन्हें तेज चमकने वाले सूरज के रूप में ही जानते हैं। डॉक्टर कलाम भारत को एक सुरक्षित ,अखण्ड एवं पूर्णतः शिक्षित राष्ट्र बनाना चाहते थे। ऐसे वैज्ञानिक  मरकर भी अमर रहते हैं और सारा विश्व उन्हें सम्मान देता है, क्योंकि उनका जीवन देश, धर्म और संप्रदाय के बंधन से मुक्त सम्पूर्ण मानवता के लिए समर्पित होता है । ऐसे  महान विभूति को शत शत नमन।

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